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गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में अमृतसर के 450वें स्थापना वर्ष को समर्पित ‘डॉ. गोपाल सिंह पुरी स्मृति व्याख्यान’ का आयोजन

अमृतसर, 21 अक्टूबर 2026 गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में पंजाबी अध्ययन स्कूल द्वारा अमृतसर के 450वें स्थापना वर्ष को समर्पित ‘डॉ. गोपाल सिंह पुरी स्मृति व्याख्यान’ का आयोजन किया गया। व्याख्यान का मुख्य विषय “अमृतसर की साहित्यिक विरासत” था। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रोफेसर एमेरिटस प्रो. (डॉ.) हरजीत सिंह गिल ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

पंजाबी अध्ययन स्कूल के प्रमुख एवं कार्यक्रम के मुख्य आयोजक प्रो. मनजिंदर सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि वैज्ञानिक होने के बावजूद सरदार गोपाल सिंह पुरी की साहित्य में गहरी रुचि थी, जिसमें उनकी पत्नी श्रीमती कैलाश पुरी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि यह स्मृति व्याख्यान साहित्य के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डीन अकादमिक मामले प्रो. (डॉ.) हरविंदर सिंह सैनी ने कहा कि यह स्मृति व्याख्यान अमृतसर के 450वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित किए जा रहे समारोहों की ही एक अगली कड़ी है। उन्होंने कहा कि अपनी विरासत को समझना और उसका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह हमारी पहचान का अभिन्न अंग है। उन्होंने विरासत को प्रस्तुत करते समय तथ्यों की प्रामाणिकता के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसी विरासत का सृजन करने की आवश्यकता है, जो लंबे समय तक अपना अस्तित्व और प्रासंगिकता बनाए रख सके।

मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) हरजीत सिंह गिल, प्रोफेसर एमेरिटस, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने कहा कि अमृतसर की साहित्यिक विरासत के निर्माण में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के संपादन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने इस महान ग्रंथ के संपादन में अपनाई गई व्यवस्थित प्रक्रिया को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। इसके बाद भाई वीर सिंह की साहित्यिक प्रतिभा और खालसा कॉलेज की स्थापना ने भी अमृतसर की साहित्यिक एवं बौद्धिक परंपरा को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि इसी परंपरा से विद्वत्ता और बौद्धिक चिंतन की एक समृद्ध धारा विकसित हुई, जिसने डॉ. गंडा सिंह, प्रिंसिपल तेजा सिंह, डॉ. मोहन सिंह दीवाना और संत सिंह सेखों जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों को जन्म दिया। इन सभी व्यक्तित्वों ने साहित्य, शोध और बौद्धिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया।

कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. बलजीत कौर रियाड़, सहायक प्रोफेसर, पंजाबी अध्ययन स्कूल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि अतीत से सीखकर और अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करके ही हम शोध एवं सृजन के माध्यम से आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सहयोग, संवाद और स्पष्ट दृष्टिकोण मिलकर जीवन के उद्देश्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. राजविंदर कौर ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया।

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