
अमृतसर, 10 सितंबर(राजन): गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की ओर से वर्ष 2027 में श्री अमृतसर साहिब की 450वीं वर्षगांठ को समर्पित एक विस्तृत 13-सूत्रीय कार्य-एजेंडा की घोषणा की गई है। इस ऐतिहासिक अवसर को केवल शहर के गौरवशाली अतीत के जश्न के रूप में नहीं, बल्कि इसके वर्तमान को समझने और मिलकर इसके भविष्य की कल्पना करने के अवसर के रूप में देखा गया है।

यह जानकारी आज यहां विशेष प्रेस-कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने दी। इस अवसर पर प्रो. एच.एस. सैणी, डीन अकादमिक मामले, प्रो. के.एस. चहल, रजिस्ट्रार, प्रो. सतनाम सिंह देओल, डीन विद्यार्थी कल्याण, प्रो. वसुधा सांब्याल, डिप्टी कोऑर्डिनेटर, डॉ. अमरजीत सिंह, डायरेक्टर सिख चेयर, प्रो. रविंदर कुमार, प्रोफेसर इंचार्ज (लोक संपर्क) और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह के नेतृत्व में तैयार की गई यह वर्ष भर चलने वाली पहल विद्वानों, नागरिकों, संस्थाओं, विशेषज्ञों, कलाकारों, विद्यार्थियों और दुनिया भर में बसे पंजाबी और सिख प्रवासी समुदाय को एक साझा मंच पर लाएगी। इसका मार्गदर्शक विषय है: “अतीत को याद करते हुए • वर्तमान को समझते हुए • भविष्य की कल्पना करते हुए।”
प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि अमृतसर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, “श्री अमृतसर साहिब आध्यात्मिकता, सेवा, मानव गरिमा, सह-अस्तित्व और सरबत का भला के सार्वभौमिक संदेश से जुड़ा हुआ है। 450वीं वर्षगांठ हमें न केवल यह मनाने का अवसर देती है कि अमृतसर ने दुनिया को क्या दिया है, बल्कि यह विचार करने का भी अवसर देती है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हम कैसा अमृतसर बनाना चाहते हैं।”
वाइस-चांसलर ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्वता को जन-भागीदारी से जोड़ेगा। “हरा-भरा और साफ-सुथरा अमृतसर” के तहत हरियाली, कचरे की छंटाई, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, पानी की बचत और जैव-विविधता जैसे क्षेत्रों में मापने योग्य मॉडल प्रोजेक्टों पर ध्यान दिया जाएगा। सांस्कृतिक पहलों में दुर्लभ तस्वीरों और दस्तावेजों की प्रदर्शनियां, विरासत अनुभव, संभावना के अनुसार लाइट एंड साउंड प्रस्तुतियां और अमृतसर की हस्तकला, संगीत, साहित्य तथा प्रदर्शनकारी कलाओं को उजागर करने वाले कार्यक्रम शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि जश्न में पुराने शहर की विरासत यात्रा, भोजन और सांस्कृतिक मेला, पुस्तक मेला और दुर्लभ पुस्तकों, पांडुलिपियों, चित्रों, नक्शों तथा अभिलेखीय सामग्री की प्रदर्शनी, इसके अलावा कवि दरबार, राग दरबार और ढाडी दरबार भी शामिल होंगे। इनके माध्यम से अमृतसर और पंजाब की समृद्ध साहित्यिक और संगीत परंपराओं को उजागर किया जाएगा।
वाइस-चांसलर ने कहा कि यह साल भर चलने वाली पहल “अमृतसर घोषणा 2027 — विश्व स्तरीय युग के लिए सरबत का भला” के साथ संपन्न होगी। अमृतसर की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत से प्रेरणा लेते हुए, इस घोषणा में मानव गरिमा, सह-अस्तित्व, दया, सेवा, टिकाऊ विकास, संवाद और सामूहिक भलाई के सार्वभौमिक सिद्धांतों को उजागर किया जाएगा और “सरबत का भला” को समकालीन वैश्विक चुनौतियों से जुड़े एक सार्थक जीवन-दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रो. करमजीत सिंह ने कहा, “हमारा प्रयास है कि 450वीं वर्षगांठ के समाप्त होने पर हमारे पीछे केवल कार्यक्रमों की यादें ही न रह जाएं। यह ज्ञान, अभिलेख, सांस्कृतिक संसाधन, पर्यावरण संबंधी मॉडल, अगले 25 वर्षों के लिए एक विजन और सबसे बढ़कर—अमृतसर की ओर से दुनिया को एक संदेश छोड़कर जाए: सरबत का भला।”
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