दिशा कमेटी की बैठक में कूड़ा, सीवरेज, ड्रेनेज, ट्रैफिक, बिजली, स्कूल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट समेत केंद्र की योजनाओं पर हुई चर्चा

अमृतसर, 10 सितंबर (राजन): सांसद गुरजीत सिंह औजला की अध्यक्षता में गुरुवार को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक हुई। बैठक में अमृतसर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र व राज्य सरकार से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा की गई। औजला ने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की प्रगति और लोगों को आ रही समस्याओं की जानकारी ली तथा लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
डीसी ऑफिस में आयोजित बैठक में शहर में कूड़े की समस्या, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, कानून-व्यवस्था, ड्रग्स, प्रदूषण और ड्रेनेज से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। तुंग ढाब ड्रेन, भगतावाला नाला और मानावाला क्षेत्र में बन रहे नए नाले से संबंधित समस्याओं को भी बैठक में उठाया गया। औजला ने कहा कि जिन योजनाओं का सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है, उनकी नियमित समीक्षा जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित इलाकों के स्कूलों की स्थिति और स्कूलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। औजला ने कहा कि योजनाओं में यदि कहीं कमी रह गई है तो उसे दूर करवाया जाएगा, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं मिल सकें।
कृषि और बिजली योजनाओं पर भी चर्चा
बैठक में कृषि विभाग से संबंधित योजनाओं पर भी चर्चा हुई। औजला ने कहा कि युवाओं और किसानों के लिए नई योजनाएं तैयार करने तथा कृषि क्षेत्र में रोजगार और काम के नए अवसर पैदा करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। नई केंद्रीय योजनाओं के तहत नए कनेक्टर और ट्रांसफॉर्मर लगाने तथा बिजली की तारों को बदलने से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई। औजला ने बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने और लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान करने पर जोर दिया।
BRTS को स्क्रैप करने पर औजला ने उठाए सवाल
बैठक में अमृतसर की पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सांसद औजला ने BRTS प्रोजेक्ट को स्क्रैप किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी प्रोजेक्ट पर बड़ी राशि खर्च हो चुकी हो और उसका काम आगे बढ़ चुका हो, तो उसे अचानक बंद करने से सरकारी पैसा बर्बाद होता है।
औजला ने कहा कि अमृतसर जैसे शहर में सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट की पहले से ही बड़ी जरूरत है। पहले लो-ब्लू लाइनों की बसें और बाद में जवाहरलाल नेहरू अर्बन रिन्यूअल मिशन के तहत बसें चलीं, लेकिन अब BRTS को भी खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को व्यवस्था में बदलाव करना था तो पुराने प्रोजेक्ट को बंद करने के साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि अमृतसर में इलेक्ट्रिक बसों और ई-व्हीकल आधारित सार्वजनिक परिवहन की जरूरत है। नई इलेक्ट्रिक बसें आने वाली हैं तो पुराने सिस्टम को खत्म करने के बजाय दोनों व्यवस्थाओं के बीच उचित ट्रांजिशन होना चाहिए था।
“सरकारी पैसे की बर्बादी के लिए जिम्मेदारी तय हो”
औजला ने कहा कि BRTS प्रोजेक्ट पर करीब 600 करोड़ रुपए खर्च होने की बात सामने आई थी और अब यह राशि करीब 1200 करोड़ रुपए तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा खर्च होता है, इसलिए ऐसे प्रोजेक्ट बनाने और बाद में उन्हें बंद करने के मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बिना उचित योजना के ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया और बाद में उसे स्क्रैप करने की स्थिति पैदा हुई, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार को सरकारी धन की बर्बादी की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।
बैठक में शहर के ट्रैफिक, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, I-Way प्रोजेक्ट और रेलवे से जुड़े रुके हुए पुल के काम पर भी चर्चा हुई। औजला ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार से संबंधित योजनाओं में जहां हस्तक्षेप की जरूरत होगी, वहां सांसद स्तर पर मामला उठाया जाएगा, ताकि विकास कार्यों का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच सके।
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