
अमृतसर, 22 सितंबर(राजन): माननीय जिला एवं सेशन न्यायाधीश, अमृतसर जतिंदर कौर की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए गांव गागरभाणा निवासी आरोपी गुरपिंदर सिंह उर्फ गोपी को अपने चाचा नरेंद्र सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला एफ.आई.आर. नंबर 233, दिनांक 4 दिसंबर 2022, थाना ब्यास, अमृतसर में दर्ज किया गया था।
प्रॉसीक्यूशन रिकॉर्ड के अनुसार, यह घटना 4 दिसंबर 2022 की सुबह करीब 7:30 बजे हुई। आरोपी क्लेर अस्पताल, रईया के निकट स्थित पीड़ित के घर के दरवाजे पर आया। जैसे ही नरेंद्र सिंह ने दरवाजा खोला, आरोपी ने अचानक उस पर हमला कर दिया। आरोपी ने कथित तौर पर नरेंद्र सिंह के पेट पर दातर/चाकू से तीन-चार वार किए तथा सिर पर भी गंभीर चोट पहुंचाई। उसकी चीखें सुनकर मृतक की पत्नी एवं शिकायतकर्ता जसवीर कौर अपने पड़ोसी गुरमेज सिंह चीमा के साथ मौके पर पहुंचीं और नरेंद्र सिंह को आगे के हमले से बचाया, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
घायल नरेंद्र सिंह को तत्काल क्लेर अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
जांच के दौरान प्रॉसीक्यूशन की ओर से हत्या का कारण आरोपी द्वारा पीड़ित के परिवार के प्रति कथित रंजिश बताया गया। विशेष रूप से, शिकायतकर्ता जसवीर कौर द्वारा आरोपी के माता-पिता की की जा रही मदद को लेकर आरोपी द्वारा नाराजगी रखने का आरोप लगाया गया। प्रॉसीक्यूशन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी नशे का आदी था और उसने अपना घर भी बेच दिया था अथवा गंवा दिया था।
एस.आई. रघबीर सिंह के नेतृत्व में की गई प्रारंभिक पुलिस कार्रवाई के दौरान एफ.आई.आर. दर्ज करने, फॉर्म 25/35 के तहत इंक्वायरी/मृत्यु संबंधी कार्रवाई पूरी करने, सिविल अस्पताल, बाबा बकाला साहिब में पोस्टमार्टम करवाने तथा शिकायतकर्ता द्वारा पेन ड्राइव में उपलब्ध करवाई गई संबंधित सी.सी.टी.वी. फुटेज को कब्जे में लेने सहित आवश्यक कार्रवाई की गई। इसके बाद एस.आई. धनविंदर सिंह के नेतृत्व में जांच टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर 16 जून 2023 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी द्वारा दिए गए कथित खुलासा बयान के आधार पर वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार—दातर/चाकू—जखीरा नहर के निकट झाड़ियों में छिपाया हुआ बरामद किया गया। इस बरामदगी संबंधी आवश्यक स्केच मेमो और मौका नक्शे भी तैयार किए गए।
रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों, जिनमें प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, सी.सी.टी.वी. फुटेज, कथित मकसद संबंधी साक्ष्य तथा वारदात में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी शामिल थी, की जांच करने के बाद माननीय अदालत ने माना कि प्रॉसीक्यूशन द्वारा आरोपी के विरुद्ध आरोप उचित संदेह से परे साबित किया गया है।
इसके आधार पर जतिंदर कौर, माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अमृतसर ने गुरपिंदर सिंह उर्फ गोपी को धारा 302 आईपीसी के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई।
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