
अमृतसर, 29 अक्टूबर (राजन): सांसद गुरजीत सिंह औजला ने आज तारा वाले पुल से गुजरते समय नहर के पानी की हालत देखकर चिंता जताई। नहर में धार्मिक तस्वीरें, पूजन सामग्री, प्लास्टिक और अन्य कचरा फेंके जाने पर उन्होंने लोगों से ऐसा न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था के नाम पर जलस्रोतों को गंदा करना न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि इससे इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जीव-जंतुओं की जिंदगी भी खतरे में पड़ती है।
औजला ने कहा कि नहर का पानी केवल मनुष्य के लिए ही नहीं, बल्कि धरती पर रहने वाले हर जीव के लिए जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि लोग घरों में धार्मिक कार्यक्रम करने के बाद देवी-देवताओं की तस्वीरें, धार्मिक वस्तुएं और अन्य सामग्री नहर में फेंक जाते हैं। इससे पानी में गंदगी बढ़ती है और जलस्रोतों की स्वच्छता प्रभावित होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम मानसिक रूप से इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि जिन धार्मिक प्रतीकों का घरों में सम्मान करते हैं, कार्यक्रम के बाद उन्हीं को उठाकर पानी में फेंक देते हैं?
इसी पानी से सरोवर और शहर को मिलता है पानी

सांसद ने कहा कि इस नहर और इससे जुड़े जलस्रोतों का महत्व समझना जरूरी है। इसी से पानी सरोवर तक पहुंचता है और नहर के पानी का इस्तेमाल शहर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने वाली परियोजनाओं में भी किया जा रहा है। ऐसे में पानी में कचरा फेंकना बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है। यदि इसी तरह गंदगी डाली जाती रही तो पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है और आने वाले समय में पानी पीने तथा अन्य इस्तेमाल के योग्य बनाए रखना भी चुनौती बन सकता है।
प्लास्टिक से बेजुबान जीवों की जिंदगी खतरे में
औजला ने कहा कि नहर में फेंका जाने वाला प्लास्टिक आसानी से नष्ट नहीं होता। यह पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाता है। पानी में रहने वाले जीवों और आसपास विचरण करने वाले पशु-पक्षियों के लिए भी यह खतरनाक है। लोग अपनी सुविधा के लिए कचरा जलस्रोतों में डाल देते हैं, लेकिन इसके कारण बेजुबान जीवों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी जिंदगी आसान बनाने के लिए दूसरे जीवों की जिंदगी खतरे में डालेंगे, तो यह उचित नहीं है।
सभी धर्मों की शिक्षाएं प्रकृति और जीवों के सम्मान का संदेश देती हैं
सांसद औजला ने कहा कि अमृतसर साझा संस्कृति, धार्मिक आस्था और भाईचारे का शहर है। यहां हर धर्म का सम्मान किया जाता है, लेकिन धार्मिक आस्था का अर्थ यह नहीं कि पूजन सामग्री या तस्वीरों को नहर में फेंक दिया जाए। लोगों को अपने धार्मिक ग्रंथों की शिक्षाओं को समझना चाहिए और मनमर्जी से ऐसे काम नहीं करने चाहिए, जिनसे प्रकृति को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि परमात्मा पर विश्वास रखने के साथ-साथ मेहनत करना, जिम्मेदारी निभाना और दूसरों के जीवन की रक्षा करना भी जरूरी है।
लोगों से हाथ जोड़कर अपील- जलस्रोतों को साफ रखें
औजला ने लोगों से अपील की कि नहरों और बहते पानी के अन्य स्रोतों में धार्मिक सामग्री, प्लास्टिक और घरेलू कचरा न फेंकें। यदि आसपास पहले से कचरा पड़ा है, तो उसे हटाने और सफाई बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जलस्रोतों को स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। पानी जीवन है और इसकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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