
अमृतसर,7 अप्रैल(राजन):आज 7 अप्रैल को ‘ वर्ल्ड हेल्थ डे’ है। आज हमें प्रण लेना चाहिए कि प्रतिदिन के काम में 30 से 40 मिनट का समय निकाल खुद को देकर कसरत करें । डॉक्टरों के अनुसार 2 वर्षों में कोविड-19 दौरान साबित कर दिया है कि जो व्यक्ति शारीरिक तौर पर फिट नहीं और वे खुद के लिए संवेदनशील नहीं हैं ।वह कभी भी बीमारी की पकड़ में आ सकता हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों में 90 प्रतिशत लोग किसी न किसी बीमारी से पीड़ित थे और जिन लोगों की मौत हुई है उनमें भी 95 फीसदी ऐसे थे जो शुगर, बीपी व अन्य गंभीर बीमारी के मरीज थे। डॉक्टरों का कहना है कोविड के बाद लोगों ने जहां खुद की सेहत और खानपान को लेकर कोरोना की दूसरी लहर के बाद परिवर्तन किया था, वहीं अब लापरवाही बरत रहे है जिसके चलते मोटापे की समस्या से परेशान हैं।
शुगर और बीपी के चलते संक्रमित होने पर समय पर रिकवरी नहीं हो पाई : सिविल सर्जन

कोरोना काल में अस्पतालों में उन मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा रही जिन्हें शुगर-बीपी के साथ अन्य गंभीर बीमारियां थीं। सिविल सर्जन डॉक्टर चरणजीत सिंह ने कहा कि शुगर, बीपीऔर अन्य बीमारियां होने के चलते जब मरीज में संक्रमण की पुष्टि हुई तो समय पर रिकवरी नहीं हो सकी। संक्रमण ने शरीर के अन्य ऑर्गन को भी खराब किया, शुरुआत से बीमारी के ज्यादा बढ़ने का कारण बीपी व शुगर ही रहीं। उन्होंने कहा इन बीमारियों से बचने के लिए लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव करना और खानपान की ओर विशेष ध्यान देना होगा।
सिविल सर्जन डॉ. चरणजीत सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में बच्चों में भी शुगर और बीपी की बीमारी के मामले बढ़ने लगे हैं। जिसका मुख्य कारण पैकेट बंद खाना और कोल्ड ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन है। डॉ. चरणजीत सिंह के अनुसार जब बच्चा खाली पेट ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाता है तो मोटापे का स्तर ज्यादा बढ़ जाता है, जिसके चलते उस से ज्यादा वजन बढ़ने लगता है। ऐसे हालात में बच्चों को शुगर होने के चांस बढ़ जाते हैं। हमें कसरत, योग के साथ-साथ पैदल चलने की आदत को अपनाना होगा। गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी को नजरअंदाज करना मोटापे का एक बड़ा कारण है। ऐसे में हरेक व्यक्ति को रोजाना 2 हजार से ज्यादा कदम पैदल चलने चाहिए।यह नुस्खे अपनाने केंसर से लेकर बीपी, शुगर और स्ट्रेस से राहत मिलेगी।
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