
अमृतसर,5 दिसंबर (राजन): पंजाब भर में चल रहा किसानों का धरना आज आज 10वें दिन में दाखिल हो गया। दसवें दिन अलग-अलग शहरों में डीसी कार्यालय के बाहर धरना दे रहे किसानों ने एक काफिले के रूप में निकलकर पूरे पंजाब से सांसदों को मोर्चे की मांगों को लेकर मांग पत्र दिए। अमृतसर जिले में डीसी कार्यालय के बाहर धरना दे रहे किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव सरवन सिंह पंधेर व प्रदेश नेता गुरबचन सिंह चब्बा के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों व मजदूरों ने एक मार्च निकालकर अमृतसर से सांसद गुरजीत औजला को मांग पत्र देने पहुंचे। सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिससे देश का संघीय ढांचा कमजोर होता है। राज्यों के अधिकार मोदी सरकार के हाथ में जा रहे हैं। आज संसद सदस्यों को मांग पत्र का एक उद्देश्य यह भी है कि संसद की आने वाली शीतकालीन स्तर में पंजाब से चुने गए सांसद लोगों के हितों की आवाज उठाएं। केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के ग्रामीण विकास फंड को रोकने पर नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली मोर्चे में किए गए वादे केअनुसार, केंद्र सरकार को मोर्चे में स्वीकृत मांगों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
दिल्ली मोर्चे की मांगें भी नहीं हुई पूरी
किसानों ने कहा कि दिल्ली मोर्चे के दौरान मोदी सरकार ने कई मांगों पर हामी भरी थी। लेकिन वे मांगें अभी तक मानी नहीं गई। लखीमपुर खीरी कत्लकांड के दोषियों 120बी के षड़यंत्र – कर्ता और 120बी के आरोपी अजय मिश्रा को तुरंत सजा जाब्ता करना चाहिए। डॉ. स्वामीनाथन की रिपोर्ट के अनुसार फसलों का मूल्य सी 2+ 50% के आधार पर दिया जाना चाहिए। 23 फसलों और एमएसपी के लिए गारंटी कानून बनाया जाना चाहिए, किसानों और मजदूरों के ऋण को समाप्त किया जाना चाहिए। बिजली वितरण लाइसेंस निज़म की अधिसूचना 2022 को रद्द किया जाए।
रायपेरियन कानून के तहत हो एसवाईएल मुद्दे का हल
किसानों का कहना है कि एसवाईएल के मुद्दे का रायपेरियन कानून के अनुसार समाधान किया जाए। संघर्ष मोर्चों पर शहीद हुए किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाए और परिवारों को मुआवजा दिया जाए। मनरेगा में दैनिक वेतन दोगुना किया जाए और मनरेगा का बजट पूरा रखा जाए। साल में 365 दिन रोजगार दिए जाए और मनरेगा का बकाया तत्काल जारी किया जाए।
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