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पंजाब में पावरकॉम के कंट्रोल रूम बने : 24 घंटे सप्लाई पर नजर रहेगी, शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

अमृतसर, 1 जुलाई :पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड  ने गर्मी और धान की बुवाई के सीजन के चलते कंट्रोल रूम बनाए हैं। उपभोक्ताओं को बिना कट के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में मॉनिटरिंग की तैयारी की है। बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए हर जोनल स्तर और पटियाला के मेन ऑफिस में विशेष कंट्रोल रूम बनाए हैं। जहां हेल्पलाइन नंबर 1912 पर भी शिकायत भेज सकते हैं। बिजली सप्लाई ठप होने या बिल से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। उपभोक्ता गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ‘PSPCL कंज्यूमर सर्विस मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा, जारी किए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके भी ऐप डाउनलोड किया जा सकता है। विभाग के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता अपनी शिकायत के समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो वह मोबाइल ऐप के जरिए अपनी फीडबैक दोबारा 1912 पर भेज सकता है।

शहरों में भी बढ़े बिजली कट

बिजली संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। कई शहरों और कस्बों में घरेलू उपभोक्ताओं को भी बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच लंबे बिजली कट लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।

16 हजार मेगावाट पहुंची डिमांड

पंजाब में भीषण गर्मी और धान की रोपाई के चरम सीजन ने बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। सोमवार को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग नया रिकॉर्ड बनाते हुए 16,130 मेगावाट तक पहुंच गई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को केंद्रीय पूल से निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेनी पड़ रही है। इसके बावजूद कई इलाकों में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। बीते कल दोपहर करीब 12 बजे राज्य में बिजली की मांग 16,130 मेगावाट दर्ज की गई। यह इस सीजन की अब तक की सबसे अधिक मांग है। बढ़ते तापमान और धान की फसल के लिए लगातार सिंचाई की जरूरत के कारण बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है।

बाहरी ग्रिड से मांगी गई सप्लाई

पंजाब की निर्धारित ड्रॉअल सीमा 10,350 मेगावाट है, जबकि राज्य वर्तमान में लगभग 10,605 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड से प्राप्त कर रहा है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न बिजली संयंत्रों और अन्य स्रोतों से करीब 5,361 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है। ताप बिजलीघरों में लहरा मोहब्बत संयंत्र से लगभग 556 मेगावाट, गोइंदवाल संयंत्र से 490 मेगावाट, रोपड़ ताप बिजलीघर से 520 मेगावाट, राजपुरा ताप बिजलीघर से 1,326 मेगावाट तथा तलवंडी साबो संयंत्र से 1,581 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, जलविद्युत परियोजनाओं से लगभग 440 मेगावाट बिजली मिल रही है।

ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही बिजली

बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती मांग और कुछ उत्पादन इकाइयों के प्रभावित होने के कारण अतिरिक्त बिजली एक्सचेंज से ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है।

इन हेल्पलाइन शिकायत दर्ज करवाएं

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