
अमृतसर, 12 जुलाई(राजन):पंजाब के राज्यपाल तथा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के चांसलर गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और नैतिक नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। वे आज गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 51वें दीक्षांत समारोह में 456 विद्यार्थियों को सम्मानित किए जाने के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इनमें 3 विद्यार्थियों को ‘चांसलर मेडल’, 35 मेधावी विद्यार्थियों को ‘मेमोरियल मेडल’, 82 शोधार्थियों को पीएच.डी. तथा 336 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं।
विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, शोध और जीवन मूल्यों का एक प्रकाश स्तंभ

इसके साथ ही न्यूयॉर्क (अमेरिका) के प्रसिद्ध अटॉर्नी-एट-लॉ जसप्रीत सिंह को मानद (ऑनर्स कॉज़ा) उपाधि से भी सम्मानित किया गया।उन्होंने शिक्षा पूरी कर समाज में कदम रखने जा रहे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, शोध और जीवन मूल्यों का एक प्रकाश स्तंभ है, जिसने देश और दुनिया को अनगिनत प्रतिभाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्था, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1969 में श्री गुरु नानक देव जी के 500वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर की गई थी। यह केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं थी, बल्कि पंजाब और देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शैक्षिक विरासत को नई दिशा देने का एक राष्ट्रीय संकल्प था। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय को अपने इतिहास में अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
दीक्षांत समारोह किसी भी शैक्षणिक संस्थान का सबसे बड़ा उत्सव होता है

अपने संबोधन में माननीय राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी शैक्षणिक संस्थान का सबसे बड़ा उत्सव होता है। उन्होंने कुलपति प्रो. करमजीत सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की अत्यंत प्रसन्नता है कि सभी विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर मेडल और डिग्रियां प्रदान की गईं। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि किसी विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देना या उन्हें डिग्रियां प्रदान करना ही नहीं होती। विश्वविद्यालय राष्ट्र की आत्मा को आकार देते हैं और समाज की चेतना का भी निर्माण करते हैं। वे समाज का मार्गदर्शन करते हैं, हमारी महान संस्कृति को सुरक्षित रखते हैं तथा नई पीढ़ी में वैज्ञानिक चेतना का विकास करते हैं। यही वे स्थान हैं, जहाँ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलती है, सामाजिक सद्भाव का ताना-बाना बुना जाता है तथा देश के आर्थिक विकास की मजबूत नींव रखी जाती है।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से विशेष अपेक्षाएँ हैं

राज्यपाल कटारिया ने कहा कि उन्हें गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से विशेष अपेक्षाएँ हैं। उन्हें विश्वास है कि भविष्य में यह संस्थान न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया में उच्चस्तरीय शोध का अग्रणी केंद्र बनेगा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.), डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य विज्ञान, कृषि नवाचार, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और वैश्विक शोध जैसे क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
अब ‘उड़ता पंजाब’ नहीं बल्कि ‘पढ़ता पंजाब’
इस अवसर पर हरजोत सिंह बैंस ने पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत की महान विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि आज पंजाब केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अनेक अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जहाँ गुरु नानक देव विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में प्रथम स्थान पर है, वहीं पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए स्कूल शिक्षा में भी पहला स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अब “उड़ता पंजाब” नहीं, बल्कि “पढ़ता पंजाब” है।
“ड्रग-फ्री पंजाब” तथा “युद्ध नशों के विरुद्ध” जैसे अभियानों को नई गति मिली
पंजाब, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए गुलाब चंद कटारिया की सराहना करते हुए प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि गांवों के नियमित दौरों, जागरूकता मार्चों, पदयात्राओं तथा सामाजिक संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने नशा-विरोधी अभियान में लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। उनके नेतृत्व में “ड्रग-फ्री पंजाब” तथा “युद्ध नशों के विरुद्ध” जैसे अभियानों को नई गति मिली। उन्होंने कहा कि इसके अलावा राज्यपाल कटारिया नियमित रूप से लोक भवन में लोक-दरबार लगाकर नागरिकों की शिकायतों का समाधान करते हैं तथा जवाबदेह प्रशासन को प्रोत्साहित करते हैं।
“पंजाबी-प्रथम शिक्षा, शोध एवं प्रशासन नीति–2026” को मंजूरी दी
प्रो. करमजीत सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “पंजाबी-प्रथम शिक्षा, शोध एवं प्रशासन नीति–2026” को मंजूरी दी है। इसके तहत पंजाबी को अंग्रेजी के साथ शोध की भाषा के रूप में प्रयोग करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है तथा उच्च शिक्षा, प्रशासन और ज्ञान सृजन में इसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी समान रूप से मजबूत रही है। पंजाब सरकार के सहयोग से विश्वविद्यालय ने “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई तथा सामाजिक चुनौतियों के समाधान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। शोध के क्षेत्र में भौतिक विज्ञान विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला की स्थापना के लिए चयनित 23 प्रमुख संस्थानों में स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने जापान की होरिबा लिमिटेड से उद्योग-प्रायोजित शोध परियोजना प्राप्त कर शोध के क्षेत्र में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया।
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