
अमृतसर, 29 सितंबर(राजन): जतिंदर कौर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (डी.एल.एस.ए.), अमृतसर के कुशल मार्गदर्शन तथा अमरदीप सिंह बैंस, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, डी.एल.एस.ए. अमृतसर के नेतृत्व में जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, अमृतसर द्वारा बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने संबंधी पॉक्सो एक्ट, 2012 पर एक विशेष जागरूकता-सह-प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन किया गया।
यह सेमिनार राष्ट्रीय कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (नालसा) तथा पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (पुलसा) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य कानूनी जागरूकता को मजबूत करना, कानून लागू करने वाली एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना तथा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्धारित कानूनी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करना था।
इस अवसर पर जसविंदर सिंह, डी.एस.पी., क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चाइल्ड, विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। सेमिनार में अमृतसर ग्रामीण तथा अमृतसर कमिश्नरेट के विभिन्न पुलिस थानों में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामलों को देखने वाले पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।
सेमिनार के दौरान नालसा और पुलसा द्वारा महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, सहायता तथा पुनर्वास के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और कानूनी सेवाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (सी.डब्ल्यू.पी.ओ.) तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई (एस.जे.पी.यू.) की भूमिका एवं जिम्मेदारियों के बारे में भी जागरूक किया गया।
बच्चों से संबंधित मामलों में बाल-अनुकूल प्रक्रियाएं अपनाने तथा प्रत्येक स्तर पर उनकी सुरक्षा, गरिमा, निजता और गोपनीयता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बाल पीड़ितों तथा देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित मामलों को पूरी संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार निपटाने के लिए जागरूक किया गया।
सेमिनार में लापता बच्चों का पता लगाने तथा उनकी सुरक्षा, देखभाल, कानूनी सहायता और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई (डी.सी.पी.यू.), जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.) तथा बाल देखभाल संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
इस अवसर पर डी.एल.एस.ए. अमृतसर द्वारा निःशुल्क कानूनी सेवाएं उपलब्ध करवाने, कानूनी जागरूकता फैलाने, पीड़ितों को सहायता प्रदान करने, विभिन्न संबंधित पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा समाज के कमजोर वर्गों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में निभाई जा रही भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत पुलिस अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इसमें विशेष रूप से मामलों की संवेदनशीलता के साथ जांच करने, बाल पीड़ितों एवं गवाहों के साथ उचित व्यवहार करने, उनके कानूनी अधिकारों और हितों की रक्षा करने तथा संपूर्ण आपराधिक न्याय प्रक्रिया के दौरान बच्चों की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया गया।
यह कार्यक्रम डी.एल.एस.ए. अमृतसर द्वारा समाज के कमजोर वर्गों तक कानूनी सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने, संबंधित संस्थानों की क्षमता बढ़ाने तथा आपसी समन्वय को मजबूत करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा था।
सेमिनार के समापन पर बाल-अनुकूल, संवेदनशील एवं जवाबदेह पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने तथा पॉक्सो एक्ट सहित बच्चों की सुरक्षा से संबंधित अन्य कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
इस प्रकार के जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से डी.एल.एस.ए. अमृतसर बच्चों के अधिकारों की रक्षा, न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने तथा नालसा, पुलसा और डी.एल.एस.ए. के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर मजबूत कर रहा है।
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