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नगर निगम द्वारा ठेकेदारों का भुगतान न करने पर ठेकेदारों ने विकास कार्य किए गए ठप्प

शहर की टूटी हुई सड़कों की तस्वीर।

अमृतसर, 7 अक्टूबर(राजन): नगर निगम अमृतसर इस वक्त भारी वित्तीय संकट में से गुजर रही है। दूसरी तरफ पंजाब सरकार के लोकल बॉडी विभाग द्वारा पंजाब की सभी नगर निगम, नगर कौंसिल और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को आदेश जारी कर दिए हैं कि अगर आपके पास फंड है तो विकास कार्यों के टेंडर लगाए जाए । नगर निगम को इस वक्त विकास कार्य करवाने वाली कंपनियों और ठेकेदारों को करोड़ों रुपया बकाया देना है।बकाया राशि न मिलने पर नगर निगम के ठेकेदारों द्वारा विकास कार्य ठप्प कर दिए गए हैं। ठेकेदार कंपनियों द्वारा नगर निगम अधिकारियों को साफ तौर पर कह दिया गया है, जब तक उनका बकाया भुगतान नहीं होता तब तक कोई भी विकास कार्य शुरू नहीं करवाया जाएगा।

शहर की टूटी हुई सड़कों की तस्वीर।

विकास कार्यों के ग्रांट राशि नगर निगम द्वारा  कूड़ा करकट एकत्रित करने वाली कंपनियों को दे दी गई

ठेकेदार कंपनी द्वारा आरोप लगाया जा रहा है, उनको जारी किए गए विकास कार्यों के टेंडर की ग्रांट राशि नगर निगम द्वारा कथित तौर पर कूड़ा करकट एकत्रित करने वाली कंपनियों को दे दी गई है। जिसमें मुख्य तौर पर केंद्र सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फारकैपिटल इन्वेस्टमेंट  (सासकी) के लगभग 21 करोड़ रूपया,एन कैप का लगभग 9 करोड़ रूपया और रोड कटिंग का लगभग 8 करोड़ रूपया जो कुल  लगभग 38 करोड़ रुपए की राशि शामिल है। इस राशि से शहर की सड़के और गलियां बनाई जानी थी।

बड़े प्रोजेक्ट के विकास कार्य रुक गए

शहर की टूटी हुई सड़कों की तस्वीर।

नगर निगम द्वारा जारी किए गए बड़े विकास कार्यों की वर्क आर्डर के कार्य ठेकेदार कंपनियों द्वारा फिलहाल रोक दिए गए हैं। निगम के बड़े-बड़े ठेकेदारों के अलावा  लगभग तीन दर्जन से अधिक छोटे ठेकेदारों की भी पिछले कई महीनो से भुगतान नहीं किया जा रहा हैं । ठेकेदार अपना भुगतान लेने के लिए नगर निगम कार्यालय  के चक्कर काट रहे हैं। नगर निगम के इस वक्त रंगला पंजाब विकास योजना के तहत ठेकेदारों द्वारा  विकास कार्य करवाए जा रहे हैं।  इसके  अतिरिक्त स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के बकाया रहते विकास कार्य भी चल रहे हैं। इन दोनों प्रोजेक्टों को लेकर नगर निगम के पास फंड है।

जीएसटी की राशि आने पर ही निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन जारी कर रहा

दिवाली से पहले ही नगर निगम का दिवाला निकल चुका है। नगर निगम को अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन देना भी कठिन हो रहा है। निगम को जीएसटी की राशि आने पर ही वेतन दिया जा रहा है।निगम द्वारा अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को महीने की 20 तारीख के बाद ही वेतन दिया जा रहा है।

एकत्रित प्रॉपर्टी टैक्स से उम्मीद जागी थी

नगर निगम को सितंबर महीने में लगभग 25 करोड़ रुपया प्रॉपर्टी टैक्स एकत्रित  हुआ है। इसके अलावा भी जनरल इनकम से निगम को फंड आया है। नगर निगम के ठेकेदारों को एकत्रित हुए प्रॉपर्टी टैक्स  और अन्य विभागों की इनकम से कुछ उम्मीद जागी थी । किंतु इतने दिन भी जाने के उपरांत भी ठेकेदारों का भुगतान नहीं हुआ है।

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