
अमृतसर,30 अगस्त:पंजाब के हड़ताली कर्मचारियों की रविवार को लुधियाना में बैठक हुई। इसमें फैसला लिया गया कि 6 सितंबर को जिला स्तर पर बैठकें की जाएंगी। 8 सितंबर को मुलाजिम सामूहिक छुट्टी पर रहेंगे। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को पंजाब सरकार के मंत्रियों के घरों का घेराव किया जाएगा। मुलाजिम संगठनों ने एक मुहिम का भी ऐलान किया। इस मुहिम का नाम ‘मुख्यमंत्री की चंडीगढ़ सचिवालय से गांव सतोज की वापसी’ रखा है। संगठनों का कहना है कि इस मुहिम के जरिए मुख्यमंत्री को चंडीगढ़ सचिवालय से वापस उनके गांव सतोज भेजना है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर यह मुहिम लगातार जारी रहेगी।
कर्मचारी यूनियन के नेता ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री पर एक फिल्म आ रही है। सरकार कह रही है कि इस फिल्म को देखें। हम निवेदन करते हैं कि ये फिल्म ना देखी जाए। इस फिल्म का हम बॉयकॉट करते है।

मुलाजिमों की चंडीगढ़ में लगेगी ‘विधानसभा’
नेता ने कहा कि सभी चंडीगढ़ में मुलाजिम विधानसभा लगाई जाएगा। जहां 117 विधायकों और 13 लोकसभा के सदस्यों को निमंत्रण देंगे। उनकी कुर्सियां लगाई जाएंगी। उनसे मुलाजिमों और पेंशनरों की मांगों को लेकर सवाल किए जाएंगे।
मुलाजिम संगठनों का किसान मोर्चे को समर्थन
इसके अलावा सांझी तालमेल कमेटी ने फैसला लिया है,कि संयुक्त किसान मोर्चे से संबंधित जत्थेबंदियों की ओर से विदेशी ट्रेड एग्रीमेंट के विरोध में 1 से 7 सितंबर तक चंडीगढ़ लगाए जा रहे मोर्चे में मुलाजिम संगठन भी शामिल होंगे। यह लड़ाई का बिगुल है। यह लड़ाई नीतिगत लड़ाई हो गई है। जिस कारण शिक्षा, सेहत सेवाएं और सरकारी अदारे बर्बाद हो रहे हैं। बेरोजगारी के कारण यूथ नशे में जा रहा है।
सरकार के शोकॉज नोटिस देने से नाराज
यूनियन के नेताओं ने कहा कि आज सेंकड़ों जत्थेबंदियां पहुंचीं। 40 जत्थेबंदियां ऐसी हैं जो किसी के साथ संबंधित नहीं है। वह लोग भी आए हैं, जिनका हम स्वागत करते हैं। कुल हम 9 मांगों पर लड़ाई लड़ रहे हैं। बड़ी संख्या में शोकॉज नोटिस भी जारी हुए है। एक पत्र जरूर जारी हुआ है, लेकिन आधिकारिक रूप से अभी कोई उस बारे जानकारी नहीं दे रहा। हम उस चिट्ठी को वापस लेने की बात कह रहे है, अन्यथा हड़ताल मुकम्मल रखी जाएगी।
एक-एक मांग माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा
नेताओं ने कहा कि हमने ये जरूर ऐलान किया है हम बातचीत नहीं करेंगे। लेकिन जब कोई बातचीत का दौर चलता है या सरकार कोई कंडीशन रखती है तो हम भी कंडीशन रखेंगे। सरकार ने जो लेटर लिखा उसकी निंदा करते हैं। अभी कोई बातचीत की बात हुई नहीं है। जब तक हमारी एक-एक मांग मानी नहीं जाती है तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा। हम किसानों और मजदूरों के बच्चे हैं। पहले भी किसानों और मजदूरों ने हमारा साथ दिया है। हम भी उनका साथ देंगे।
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