
अमृतसर,22 जून : पंजाब के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे पर सोमवार को उस समय बड़ा असर देखने को मिला जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ अफसरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सामूहिक हड़ताल कर दी। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिसके चलते कई स्वास्थ्य केंद्रों पर कामकाज ठप हो गया। हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने “सरकार मुर्दाबाद” और “स्वास्थ्य कर्मियों को पक्का करो” जैसे नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीण क्षेत्र के एक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कम्युनिटी हेल्थ अफसर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से ग्रामीण इलाकों में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं । उन्होंने कहा कि आपदा और महामारी के कठिन समय में भी उन्होंने बिना किसी भय के लगातार सेवाएं दीं, लेकिन अब उनकी समस्याओं और मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
मांगों को लेकर सरकार नहीं गंभीर
कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग और सरकार को कई बार उनकी मांगों से अवगत करवाया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बजाय उन पर कार्यभार बढ़ाया जा रहा है, जिससे उनका मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान कम्युनिटी हेल्थ अफसरों ने नए इंसेंटिव प्रपत्र को तानाशाही फैसला बताते हुए उसकी प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करना, वेतन में वृद्धि करना, अन्य राज्यों की तुलना में कम दिए जा रहे वेतन अंतर को समाप्त करना, नए इंसेंटिव प्रपत्र को वापस लेना, कैडर को स्वीकृत कर कर्मचारियों को नियमित करना, लॉयल्टी बोनस जारी करना और इंसेंटिव को मूल वेतन में शामिल करना शामिल है।
कर्मचारियों की हड़ताल तेज करने की चेतावनी
हड़ताल कर रहे कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन एक जुलाई तक जारी रहेगा और इसके बाद दो जुलाई को मुख्यमंत्री के आवासीय क्षेत्र स्थित स्थान पर राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान यदि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं या मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी। इस हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है ।
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