
अमृतसर, 14 जुलाई(राजन):कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने सोमवार को अजनाला हल्के के चमियारी स्तिथ ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OAT) सेंटर का दौरा कर वहां इलाज करा रहे नशा पीड़ितों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों से विस्तार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति को समझे बिना इस लड़ाई को निर्णायक रूप से नहीं जीता जा सकता। इसी उद्देश्य से वह विभिन्न OAT सेंटरों का दौरा कर रहे हैं, ताकि वास्तविक हालात की रिपोर्ट सरकार तक पहुंचाई जा सके।
औजला ने बताया कि केवल अजनाला के OAT सेंटर में ही लगभग 650 मरीज पंजीकृत हैं, जो नियमित रूप से दवा लेने पहुंचते हैं। उन्होंने मरीजों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकांश मरीजों ने बताया कि वे चार से पांच वर्षों से नशे की लत से जूझ रहे हैं और दवा लेने के बावजूद पूरी तरह नशे से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
‘पांच साल में किसी मरीज की नियमित काउंसलिंग तक नहीं हुई’

सांसद ने कहा कि उन्होंने कई मरीजों से पूछा कि क्या कभी उनकी नियमित काउंसलिंग हुई, क्या किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) ने उनका उपचार किया या उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए योग, व्यायाम, पुनर्वास शिविर अथवा अन्य गतिविधियां कराई गईं। अधिकांश मरीजों का जवाब नकारात्मक था। उन्होंने कहा कि केवल दवा देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मान सकती।
‘दवा की कमी होते ही फिर अवैध नशे की ओर लौट जाते हैं मरीज’

औजला ने कहा कि अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। जब दवा समय पर नहीं मिलती या उसकी उपलब्धता में समस्या आती है तो कई लोग दोबारा अवैध नशे का सेवन शुरू कर देते हैं। मरीजों ने उन्हें बताया कि अवैध नशा बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाता है और बहुत कम कीमत पर घर तक पहुंचा दिया जाता है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
रामदास समेत अन्य OAT सेंटरों का भी करेंगे दौरा
औजला ने कहा कि अजनाला ही नहीं, बल्कि रामदास, संगतपुरा और अन्य क्षेत्रों के OAT सेंटरों से भी इसी तरह की शिकायतें मिल रही हैं। वे सभी सेंटरों का दौरा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे और सरकार के समक्ष रखेंगे, ताकि नीतिगत स्तर पर सुधार किए जा सकें।
अस्पताल परिसर की व्यवस्थाओं पर भी उठाए सवाल
सांसद ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के पास ही लंबे समय से खाली स्थान है और वहां अव्यवस्था की शिकायतें मिलीं, जहां कुछ युवक सरेआम नशा कर रहे थे के उन्हें देखकर भाग गए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों की आधारभूत सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।
‘जमीनी सच्चाई छिपाने से समस्या खत्म नहीं होगी’
औजला ने कहा कि यदि संबंधित विभाग वास्तविक स्थिति को सरकार तक नहीं पहुंचाएंगे तो नशे के खिलाफ अभियान प्रभावी नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और समाज—सभी को मिलकर काम करना होगा। केवल आंकड़े प्रस्तुत करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
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