
अमृतसर,15 सितंबर(राजन): राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस के अवसर पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में “अमृतसर बल्क वाटर सप्लाई स्कीम प्रोजेक्ट (ऐ.बी. डब्लयू .एस.एस): अमृतसर शहर में सतत जल आपूर्ति के लिए एक इंजीनियरिंग समाधान” विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का आयोजन नगर निगम द्वारा लार्सन एंड टुब्रो तथा इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन के सहयोग से किया गया। इस सेमिनार का उद्देश्य इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को अमृतसर के हर घर तक शुद्ध पानी की लगातार स्पालई, जल संरक्षण तथा सतत शहरी जल प्रबंधन के लिए शुरू किए गए ऐ.बी. डब्लयू.एस.एस प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग की भूमिका के बारे में जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम की शुरूआत महान इंजीनियर और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी को पुष्पांजली अर्पित करके की गई । इस मौके पर ऐ.बी. डब्लयू.एस.एस प्रोतेक्ट के निगारन इंजीनियर डा. जीतिन वासुदेवा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वेश्वरैया जी के इंजीनियरिंग क्षेत्र में योगदान और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण आज भी देश के इंजीनियरों के लिए प्रेरणास्रोत है।

विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख प्रो. (डा.) मिनाक्षी सिंघल ने इस अ कहा की “सतत विकास के लिए इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी है।” अमृतसर जैसे ऐतिहासिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए विश्वसनीय, सुरक्षित और सतत जल आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है।
इस अवसर पर ऐ.बी. डब्लयू.एस.एस प्रोजेक्ट के तकनीकि पहलुओं के बारे में जानकारी देते हुए लार्सन एंड टुब्रो के दिलप्रीत सिंह संधू ने कहा कि नगर निगम द्वारा इस समय शहर में लगभग 600 ट्यूबवेलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है और अमृतसर के शहरी क्षेत्र में ही भूजल कि निकासी 324 प्रतिशत के आस-पास है। जिस कारण शहर में पानी के स्पालई के लिए ज्यादा समय तक भूजल पर निर्भर नही रहा जा सकता। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार द्वारा शहर में स्थायी और सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अमृतसर बल्क वाटर स्पालई प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई है।

जिसके तहत आने वाले समय में यू.बी.डी.सी नहर के पानी को साफ करके पानी की स्पालई की जाएगी। शहर की आबादी को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट के तहत वल्ला के पास निर्माणअधीन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 44 करोड़ लीटर प्रतिदिन की होगी जिससे की साल 2055 में शहर की अनुमानित 22 लाख की आबादी की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। प्रोजेक्ट के अधीन 112 कि.मी लंबी पाइपलाईन बिछाने के साथ-साथ 39 नई टैंकियों का निर्माण और 24 पूरानी टैंकियों के नवीनिकरण का काम भी बड़ी तेजी से चल रहा है। इस प्रोजेक्ट से ना सिर्फ पूरे शहर में एक ही गुणवत्ता आई.एस.ओ 10500-2012 मानक के पानी की स्पलाई होगी बल्कि इससे नगर निगम द्वारा पानी के सपालई में आने वाले खर्च में भी काफी कमी होगी।
इस मौके पर प्रो. (डा.) मनींदरपाल सिहं, एलएंडटी के प्रोजेक्ट डायरेक्ट्र के. शिवरामाकृष्णा, नरेंद्रपाल सिहं, दलजीत सिहं कोहली, गीरिराज सिहं हाडा, अश्वनी कुमार, संजय कुमार, सुखबीर सिहं आदि भी उपस्थित थे।
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