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फाइनेंसियल असिस्टेंट (जीएसटी) के सहारे चलता है नगर निगम

अमृतसर,29 मार्च (राजन): साल 2006 में तत्कालीन पंजाब सरकार ने नगर निगम से चुंगी समाप्त कर दी गई थी। उस वक्त नगर निगम की आमदनी का मुख्य स्रोत चुंगी विभाग हुआ करता था। जिसको लेकर माननीय हाईकोर्ट में केस दायर हुए। माननीय हाईकोर्ट के आदेशानुसार पंजाब सरकार व्यापारियों को सेल टैक्स में सरचार्ज लगाकर नगर निगम को चुंगी के एवज में बनता टैक्स देना शुरू कर दिया । हाईकोर्ट के आदेश अनुसार  पंजाब सरकार द्वारा नगर निगमों को चुंगी के एवज में पहले सेल टैक्स, फिर वैट और अब जीएसटी मे से  फाइनेंसियल असिस्टेंट फंड प्रत्येक वर्ष लगातार मिल रहा है।

साल 2023-24 में 215 करोड़ आने की आस

इस बार भी नगर निगम के बजट में चुंगी के एवज में फाइनैंशल असिस्टेंट जीएसटी  फंड के रूप में 215 करोड़ रुपए रखा गया है। पिछले 5 वर्षों में नगर निगम  जीएसटी से आने वाला फंड साल 2019-20 में 151.13 करोड़ रुपए रखा ,118.88 करोड़ मिला। इसी तरह से साल 2020 -21 में 181.90 करोड़ रखा,153.31 करोड़ मिला। साल 2021-22 में  216.69 करोड़ रुपए  रखा,182.96 करोड मिला। साल 2022 -23 में 216.69 करोड रुपए रखा,31 दिसंबर 2022 तक 111.70 करोड़ रुपए मिला और 1 जनवरी 31मार्च 2023 तक 104.98 करोड़ रुपए आने की उम्मीद रखी गई है। इसी तरह से साल 2023-24 के बजट में नगर निगम ने 215 करोड रुपए रखा गया है।

नगर निगम के बजट में आमदनी का मुख्य स्रोत जीएसटी है

नगर निगम की बजट की आमदनी में मुख्य स्रोत फाइनेंशियल असिस्टेंट (जीएसटी) का 215 करोड रुपए है। नगर निगम के कुल 452 करोड़ रुपयों के बजट में 325 करोड़ रुपया वेतन, पेंशन व अन्य पर खर्च किया जाता है। इसमें महत्वपूर्ण योगदान  फाइनेंसियल असिस्टेंट  215 करोड़ रुपया ही हैं। नगर निगम को जिस भी महीने सरकार से यह राशि नहीं आती तो नगर निगम को वेतन देने के लाले पड़ जाते हैं।

विकास के लिए 113 करोड रुपए, शहर का विकास केंद्र और प्रदेश  सरकार की ग्रांट पर

नगर निगम के बजट में चाहे शहर के विकास के लिए 113 करोड़ रुपए रखे गए हैं। किंतु इसमें से विकास हैड में ऑडिट फीस, लीगल चार्जेस, इलेक्शन चार्जेस, निगम इमारतों के निर्माण के खर्च भी जोड़े गए हैं। इन खर्चों को निकाल दें तो
विकास के लिए कम राशि ही बचती हैं। शहर का विकास मुख्य तौर पर केंद्र और प्रदेश सरकार की ग्रांटो पर ही होता है। ऐसा पिछले लंबे अरसे से देखा जा रहा है। इस वक्त भी नगर निगम के पास स्मार्ट सिटी मिशन के करोड़ों रुपए हैं। इसके साथ साथ केंद्र सरकार की अमरुत योजना, अन्य योजना  तथा पंजाब सरकार की योजनाओं के रूप में करोड़ों रुपयों की ग्रांट आती रहती है।

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