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विवादों में अमृतसर वाॉल्ड सिटी के विकास के लिए लगभग 417 करोड़ के टेंडर की रोचक बातें सामने आ रही

नगर निगम अमृतसर कार्यालय की तस्वीर।

अमृतसर, 29 जनवरी : विवादों में दिख रहे अमृतसर वाॉल्ड सिटी के विकास के लिए नगर निगम द्वारा लगभग 417 करोड़ रुपयो का टेंडर को लेकर रोचक बाते सामने आ रही है। नगर निगम द्वारा अमृतसर वाॉल्ड सिटी के विकास के लिए 206,51,42444  रुपयो का एक टेंडर और  211,31,05 982 रुपयो का दूसरा टेंडर 27 नवंबर 2025 को जारी किया गया था। इन दोनों टेंडरों को 23 दिसंबर 2025 को खोला गया। दोनों टेंडरो में सिर्फ एक पार्टी ने बिड भरी है। नगर निगम की टेंडर कमेटी द्वारा इन दोनों टेंडरों की टेक्निकल इवेलुएशन की जा रही है।

इनएंटीसिपेशन अप्रूवल ऑफ़ द हाउस की मंजूरी ली गई

नगर निगम द्वारा इतने बड़े-बड़े दो टेंडर लगाने के लिए इन एंटीसिपेशन अप्रूवल ऑफ़ द हाउस की मंजूरी ली गई। लगभग 417 करोड़ रुपए के टेंडर लगाने के लिए नगर निगम के जनरल हाउस की मीटिंग में डिस्कशन करनी चाहिए थी। नगर निगम जनरल हाउस में अमृतसर शहर के 85 पार्षद और जिला अमृतसर के 7 विधायक सदस्य हैं। अगर निगम जनरल हाउस के सदस्यों से बहुमत से मंजूरी ली जाती, तब ही विकास कार्यों के इतने बड़े-बड़े दो टेंडर लगवाने चाहिए थे। अलबत्ता नगर निगम अधिकारियों ने इन दोनों टेंडरों के एस्टीमेट बनवाकर नगर निगम मेयर से इन दोनों टेंडरों की इन एंटीसिपेशन अप्रूवल का द हाउस मंजूरी लेकर टेंडर वेबसाइट में अपलोड कर दिए गए। बता दे कि इन एंटीसिपेशन अप्रूवल ऑफ़ द हाउस का मतलब होता है कि जनरल हाउस की बहुमत से मंजूरी लेने की जिम्मेदारी मेयर लेता है। नगर निगम के पास इन दो टेंडरों को लेकर कोई भी राशि उपलब्ध ना होने के बावजूद इन एंटीसिपेशन की मंजूरी से ही टेंडर लगा दिए गए। यह एक बहुत ही बड़ी जांच का विषय है।

पिछले 38 दिनों से टेक्निकल इवैल्यूएशन हो रही है

नगर निगम अधिकारियों की टेंडर कमेटी द्वारा इन दोनों टेंडरों की टेक्निकल इवैल्यूएशन करके लोकल बॉडी विभाग की चीफ इंजीनियर कमेटी को पहले भेजी गई थी। चीफ इंजीनियर कमेटी ने इन दोनों टेंडरो पर अपने रिमार्क्स लिखकर वापस नगर निगम को भेज दिया था। निगम द्वारा पिछले 38 दोनों में इन दोनों टेंडरों की टेक्निकल इवेलुएशन की जा रही है। नगर निगम द्वारा टेक्निकल इवैल्यूएशन दोबारा करके चीफ इंजीनियर कमेटी को भेजी जाएगी। इतने लंबे अरसे से एक ही पार्टी द्वारा डाली गई दोनों टेंडरों की बिड की अभी तक टेक्निकल इवोल्यूशन ही चल रही है। माननीय सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ई टेंडर में जिस पार्टी द्वारा जो डॉक्यूमेंट लगाए जाते हैं, टेंडर कमेटी इस डॉक्यूमेंट के बारे में पार्टी से वेरिफिकेशन कर सकती है। गाइडलाइन के अनुसार कोई भी नया डॉक्यूमेंट ई टेंडर में दोबारा नहीं लगाया जा सकता है। यह भी एक जांच का विषय है ?

नगर निगम के पास फंड नहीं है

नगर निगम की इस वक्त वित्तीय स्थिति बहुत ही खराब चल रही है। नगर निगम को वेतन देने के लिए भी जीएसटी की राशि आने का इंतजार किया जाता है। नगर निगम द्वारा पहले से करवाए जा रहे विकास कार्यों के एवज में करोड़ रुपयो  का भुगतान नहीं हो पा रहा है। जिस पर कुछ ठेकेदारों द्वारा मंजूर हुए विकास कार्य को रोक दिया गया है।नगर निगम द्वारा जारी किए गए 417 करोड़ रुपयो के टेंडर के लिए निगम के पास कोई भी फंड नहीं है। नगर निगम के इन दो टेंडरो के लिए कोई भी विशेष ग्रांट नहीं है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट अमृतसर के टेंडर को तो हाई कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया गया, अब नगर निगम के दो टेंडर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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