
अमृतसर,25 फरवरी:पंजाब में परमानेंट डीजीपी लगाने के लिए यूपीएससी ने पैनल मांग लिया है। अभी गौरव यादव कार्यकारी डीजीपी के तौर पर काम कर रहे हैं। यूपीएससी के इस फैसले से तय है कि पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस को परमानेंट डीजीपी मिल जाएगा।कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकारी डीजीपी की प्रथा को लेकर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये.प्रथा ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यूपीएससी अपने लेवल पर सरकारों से नाम मांगे।इसमें पंजाब सरकार के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे। जिसके बाद डीजीपी के लिए 3 नाम भेजे जाएंगे। जिसमें सरकार को किसी एक को चुनकर परमानेंट डीजीपी लगाना होगा।रिपोर्ट्स के मुताबिक इस आदेश के बाद पंजाब पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भेजे जा सकते हैं।
पंजाब में साढ़े 3 साल से एक्टिंग डीजीपी
पंजाब में पिछले करीब साढ़े 3 साल से 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव ने डीजीपी पद संभाला हुआ है। उनकी 4 जुलाई 2022 को इस पद पर नियुक्ति हुई। पंजाब सरकार ने इस संबंध में यूपीएससी को नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल नहीं भेजा। पंजाब सरकार ने 2023 में पुलिस एक्ट में संशोधन कर यूपीएससी को बाइपास करने की कोशिश की थी, लेकिन वर्तमान में कोई रेगुलर नियुक्ति नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 20 दिन पहले राज्यों में कार्यकारी डीजीपी नियुक्त करने की प्रथा पर सवाल खड़े किए थे। कोर्ट ने कहा कि यह तरीका योग्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को डीजीपी पद के लिए विचार से वंचित करता है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों
का उल्लंघन करते हुए समय पर संघ लोक सेवा आयोग
(यूपीएससी ) को डीजीपी चयन के लिए नाम नहीं भेजतीं । इसके बजाय कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर देती हैं। कोर्ट ने यूपीएससी को कहा कि यदि कोई राज्य ऐसा करने में विफल रहता है तो यूपीएससी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता।
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