
अमृतसर, 11 मई :डिप्टी कमिश्नर अमृतसर दलविंदरजीत सिंह ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे गेहूं की पराली को आग बिल्कुल न लगाएं। उन्होंने कहा कि पराली को आग लगाने से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश सहित बड़ी मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें वातावरण में फैलती हैं, जिससे मनुष्यों में सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन तथा त्वचा रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ रही गर्मी के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव पिछले कुछ वर्षों के दौरान फसलों की खेती पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप बेमौसमी बारिश से अचानक बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं तथा तापमान बढ़ने के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों पर लगने वाले कीटों और बीमारियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कृषि क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल खेती तकनीकों को प्राथमिकता देनी होगी।
डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे बड़े मानवीय हितों को ध्यान में रखते हुए गेहूं की पराली को आग बिल्कुल न लगाएं, ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि गेहूं की पराली के वैज्ञानिक तरीके से निपटान के लिए किसान कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जिले में गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं, जो किसानों को जागरूक कर रहे हैं और उन्हें पराली को आग न लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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