
अमृतसर, 8 सितंबर(राजन):गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने कहा कि मानसिक पीड़ा और तनाव का एक बड़ा कारण अपनी आध्यात्मिक जड़ों, अपनी वास्तविक पहचान और सृष्टिकर्ता से दूर होना है। जब व्यक्ति स्वयं को पहचानता है, आत्मज्ञान प्राप्त करता है और सृष्टिकर्ता से जुड़ता है तो उसके जीवन में तनाव और चिंताएं कम होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि गुरबाणी के सिमरन, आत्मचिंतन और सेवा के साथ आधुनिक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर मानसिक स्वास्थ्य को और मजबूत किया जा सकता है।

उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से आर.यू.एस.ए. 2.0 (आउटरीच गतिविधियों) के तहत गोल्डन जुबली कन्वेंशन सेंटर में ‘मानसिक स्वास्थ्य मायने रखता है’ विषय पर आयोजित विशेष सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। सेमिनार में गुरबाणी के दार्शनिक विचारों, आधुनिक मनोविज्ञान और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

सेमिनार के दौरान भाटिया न्यूरो साइकियाट्रिक अस्पताल, अमृतसर के प्रसिद्ध मनो-रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.पी.एस. भाटिया ने विद्यार्थियों के साथ विशेष प्रश्नोत्तर सत्र किया। उन्होंने ‘स्वयं’, ‘अस्तित्व’ और ‘जीवन के उद्देश्य’ से जुड़े विचारोत्तेजक सवाल विद्यार्थियों के सामने रखे। विद्यार्थियों ने अपने विचारों और व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर इन सवालों के जवाब दिए।
डी.आर.डी.ओ., जालंधर की वैज्ञानिक ‘डी’ डॉ. निष्ठा मेहरा ने मानसिक लचीलेपन और तनाव पैदा करने वाले कारणों की पहचान के बारे में जानकारी दी।
सेमिनार के अंत में मनोविज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. रूपन ढिल्लों ने वक्ताओं, अतिथियों, विद्यार्थियों और स्टाफ का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि गुरबाणी, आध्यात्मिकता और आधुनिक मनोविज्ञान के बीच संवाद मानसिक स्वास्थ्य के प्रति व्यापक समझ विकसित करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संवाद युवाओं को अपनी भावनाओं, सोच और जीवन के उद्देश्य को समझने के लिए प्रेरित करते हैं।
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