
अमृतसर, 24 सितंबर(राजन): गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई.) अमृतसर जोन की दूसरी जोनल काउंसिल बैठक के दौरान विश्वविद्यालय और स्थानीय उद्योग के बीच निरंतर साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बैठक हॉलिडे इन, अमृतसर में आयोजित की गई। इस बातचीत में भारतीय प्रबंध संस्थान, अमृतसर के निदेशक प्रो. समीर के. श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।
उद्योग के सदस्यों को संबोधित करते हुए प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि कारोबारी संस्थान विद्यार्थियों को मार्गदर्शन, इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट और अकादमिक पाठ्यक्रम के लिए सुझाव देकर उनकी शिक्षा में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके बदले गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अपनी फैकल्टी की विशेषज्ञता, प्रयोगशालाओं और शोध टीमों के माध्यम से कंपनियों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकता है।
उप-कुलपति ने सी.आई.आई. के सदस्यों को सुझाव दिया कि वे उद्योग से संबंधित विशेष समस्याओं की पहचान करें, जिन पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर काम कर सकें। इसके बाद कंपनियां संभावित समाधानों का परीक्षण और उन्हें अपना सकती हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण कौशल, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य, कपड़ा, आपूर्ति श्रृंखला, सतत विकास और उद्यमिता विकास को साझेदारी के संभावित क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया।
साझेदारी को निरंतर बनाए रखने के लिए उन्होंने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय–सी.आई.आई. उद्योग–अकादमिक परिषद बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसकी त्रैमासिक बैठकें हों तथा उद्योग की समस्याओं, इंटर्नशिप के अवसरों और मार्गदर्शकों की साझा सूचियां तैयार की जाएं। प्रायोजित शोध, औद्योगिक अध्यक्ष, साझा प्रयोगशालाएं, छात्रवृत्तियां और वार्षिक उद्योग–विश्वविद्यालय दिवस की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि 2026–27 में ठोस परियोजनाओं, मार्गदर्शकों और इंटर्नशिप के साथ इस साझेदारी की शुरुआत की जाए।
इससे पहले सी.आई.आई. अमृतसर जोन के चेयरमैन कपिल मेहरा ने क्षेत्रीय विकास को सहयोग देने के लिए उद्योग–अकादमिक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वाइस चेयरपर्सन प्रनीत बब्बर ने सदस्यों और अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
बातचीत के दौरान ‘इंडस्ट्री प्रॉब्लम बैंक’ विकसित करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया, जिसके माध्यम से कारोबारी संस्थान वास्तविक समस्याओं की पहचान कर सकें और अकादमिक संस्थान विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को व्यावहारिक समाधान के लिए काम करने में सहायता कर सकें।
बातचीत के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में संभावित साझेदारी के बारे में भी विचार किया गया, जिनमें उद्योग-केंद्रित कौशल विकास और विशेष प्रशिक्षण, औद्योगिक परियोजनाएं, इंटर्नशिप और अनुभव-आधारित शिक्षा, ‘प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस’ और अकादमिक कार्यक्रमों में उद्योग की भागीदारी, कारोबारों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, के लिए अनुप्रयुक्त शोध और परामर्श, उद्यमिता विकास, नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विश्लेषण और उभरती डिजिटल क्षमताएं, पर्यटन, विनिर्माण, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण और सेवाएं तथा विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता और उद्योग के लिए तैयारी को मजबूत करना शामिल था।
बातचीत के दौरान उद्योग–अकादमिक साझेदारी के लिए एक निरंतर और सुव्यवस्थित मंच स्थापित करने के महत्व पर भी जोर दिया गया, जिसके माध्यम से नियमित संवाद, उद्योग की चुनौतियों की पहचान और व्यावहारिक समाधानों का विकास किया जा सके।
ओपन हाउस के दौरान सी.आई.आई. के सदस्यों ने स्थानीय कारोबारी माहौल को मजबूत करने और उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के अधिक अवसर पैदा करने के संबंध में अपने विचार साझा किए। बातचीत के दौरान क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए अमृतसर के मजबूत अकादमिक संस्थानों, उद्यमशील आधार और उभरते क्षेत्रों का लाभ उठाने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
सत्र के अंत में प्रनीत बब्बर ने चर्चा को निरंतर साझेदारी और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से कार्रवाई योग्य पहलों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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