
अमृतसर, 18 मार्च :पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के नगर निकाय चुनावों से जुड़ी वार्डबंदी विवाद पर अहम फैसला सुनाते हुए बठिंडा और मोहाली नगर निगम को छोड़कर पंजाब की अन्य 7 नगर निगमों तथा 100 से अधिक नगर परिषदों/नगर पालिकाओं में की गई नई वार्डबंदी को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन निकायों में यदि चुनाव होते हैं तो वे पहले वाली वार्डबंदी के आधार पर ही कराए जाएंगे।
हाईकोर्ट ने बठिंडा और मोहाली नगर निगमों से जुड़ी याचिकाओं पर अंतिम फैसला 23 मार्च के लिए सुरक्षित रख लिया है, जिससे इन दोनों शहरों में चुनावी स्थिति पर सस्पेंस बरकरार है।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में स्वीकार किया कि बठिंडा और मोहाली में वार्डबंदी की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 से पहले पूरी कर ली गई थी।
पंजाब की अन्य 7 नगर निगमों व कौंसिलों में यह प्रक्रिया 7 जनवरी 2026 के बाद लागू की गई। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार वार्डबंदी 31 दिसंबर तक पूरी होनी चाहिए थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे 8 जनवरी तक जारी रखा और बाद में 8 दिन की देरी को माफ करने के लिए केंद्र को पत्र लिखा।
7 नगर निगमों की नई वार्डबंदी को अमान्य घोषित कर दिया गया
अदालत ने माना कि केंद्र की जनगणना संबंधी अधिसूचना के बाद वार्ड सीमाओं में बदलाव करना नियमों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर बटाला, पठानकोट, कपूरथला, होशियारपुर, अबोहर, मोगा और बरनाला नगर निगमों की नई वार्डबंदी को अमान्य घोषित कर दिया गया।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद 7 नगर निगमों और 100 से अधिक नगर परिषदों/नगर पालिकाओं में चुनाव पुरानी वार्डबंदी पर होंगे। बठिंडा और मोहाली पर 23 मार्च को अंतिम फैसला आएगा। अब इन चुनाव से पंजाब में नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया और टाइमलाइन पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।
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