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नशा तस्करी में संलिप्त पुलिस अधिकारी; हाईकोर्ट द्वारा बनाई सिट की जांच पूरी

एडीजीपी  हरप्रीत सिंह सिद्धू की फाइल फोटो।

अमृतसर,15 अप्रैल (राजन): पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से 2017 नशा तस्करी के मामले में गठित स्पेशलइन्वेस्टिगेशन टीम (सिट) ने जसस्टिस सूर्यकांत द्वारा बताए गए 4 मापदंडों के दायरे में ड्रग्स समग्लिंग से जुड़ी जांच को पूरा कर लिया है। इस रिपोर्ट में  एआईजी राज जीत सिंह हुंदल के अलावा एक आईपीएस अधिकारी सहित 3 अन्य के नाम शामिल होने का संकेत मिला है। मिली जानकारी के अनुसार एआईजी राज जीत सिंह की पूरी प्रॉपर्टी का भी रिकॉर्ड इस रिपोर्ट में दिया गया है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में 3 पुलिस अधिकारियों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिन्होंने इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह (हेड कॉन्स्टेबल रैंक से प्रमोटिड), जो अब जेल में है, की ट्रांसफर अपने एरिया में करवाई थी।

एडीजीपी  सिद्धू पर लगाए गए इल्जाम झूठे

स्पेशल टॉस्क फोर्स  के प्रमुख  एडीजीपी  हरप्रीत सिंह सिद्धू पर इंद्रजीत सिंह को गिरफ्तार करने के बाद पक्षपात करने का आरोप लगाने वाली राज जीत सिंह की याचिका पर भी इस रिपोर्ट में क्लीन चिट दी गई है। जिससे स्पष्ट होता है कि  एडीजीपी  सिद्धू पर लगाए गए इल्जाम झूठे थे। दरअसल, उच्च न्यायालय ने सिट को जांच के लिए 2- पैरामीटर पर जांच के लिए कहा था। पहला: क्या एडीजीपी  हरप्रीत सिंह सिद्धू याचिकाकर्ता के खिलाफ पक्षपाती थे। दूसरा: पंजाब में राजजीत सिंह और ड्रग तस्करों के साथ इंद्रजीत की साठगांठ की जांच करना।

तस्करों और 4 पुलिस अधिकारियों के साथ थी इंद्रजीत की साठगांठ

सूत्रों से पता चला है कि सिट ने उसे सौंपे गए कार्य को पूरा कर लिया है। दूसरे मामले की जांच करते हुए, सिट ने तस्करों और 4 पुलिस अधिकारियों के साथ इंद्रजीत की सांठ-गांठ पाई है। जिनमें से तीन पीपीएस  और एक पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं।

नियम के हट कर हेड कॉन्स्टेबल करता रहा मामले दर्ज

सिट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन 4 अधिकारियों ने एसएसपी के रूप में पोस्टिंग के दौरान अवैध रूप से एक हेड कॉन्स्टेबल इंदरजीत सिंह को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस ) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी। जबकि नियमों अनुसार एएसआई के रैंक से नीचे का अधिकारी एनडीपीएस  का केस दर्ज नहीं कर सकता। इसने आरोपी तस्करों को अदालतों से बरी होने में मदद मिलती रही।

रिटायर्ड डीएसपी  ने भी उठाए सवाल

इंदरजीत सिंह के साथ काम कर चुके रिटायर्ड डीएसपी जसवंत ने अपने बयान में साफ कहा अधिकारी अच्छी तरह से जानते हुए कि इंद्रजीत का रैंक एक हेड कॉन्स्टेबल का था और इसके बावजूद एसएसपी राज जीत ने उसे एनडीपीएस अधिनियम के तहत एफ आई आर दर्ज करने की अनुमति दी। इसी खामी को बाद में तत्कालीन  एसटीएफ  प्रमुख हरप्रीत सिद्धू द्वारा खोजा गया था।

जल्द एक्शन हो सकता है पुलिस के सीनियर अधिकारियों पर

सिट द्वारा समय पर अगली तारीख में यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश मामले में यह तीसरी रिपोर्ट अपना काम खत्म करने के बाद हो सकती है। जो समय पर दाखिल की जा रही है। जिससे ड्रग ट्रैफिकिंग में शामिल पुलिस अधिकारियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

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