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कांग्रेस द्वारा 50 साल पहले लगाया गया आपातकाल देश के इतिहास का भयावह काला दिन: चरणजीत अटवाल

अमृतसर, 25 जून(राजन): तत्कालीन कांग्रेसी प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान 13 महीने 6 दिन की जेल काटने तथा यातनाएं झेलने वाले दो बार विधायक, दो बार विधानसभा स्पीकर, दो बार सांसद व एक बार लोकसभा के डिप्टी स्पीकर रहे चरणजीत सिंह अटवाल को भाजपा जिलाध्यक्ष हरविंदर सिंह संधू ने अपने टीम के सदस्यों डॉ. राम चावला, गुरप्रताप सिंह टिक्का, सलिल कपूर व मनीष शर्मा, संतोख सिंह गुमटाला, ओम प्रकाश अनार्य, इन्द्रजीत सिंह बासरके, हरदीप सिंह गिल आदि के साथ पुष्पगुच्छ व दोशाला देकर सम्मानित किया। पत्रकारवार्ता के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए चरणजीत सिंह अटवाल ने आपातकाल के दौरान उनके साथ घटित वृतांत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें भी जबरन उठाकर जेल में डाल दिया गया और घोर अमानवीय यातनाएं दी गई।

आपतकाल के योद्धाओं को किया सम्मानित

इस अवसर पर भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आपातकाल के दौरान जेल में सजाएं काटने तथा अत्याचार झेलने वाले गुरुनगरी के योद्धाओं को चरणजीत सिंह अटवाल व हरविंदर सिंह संधू ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ सिरोपा व प्रशंसा-पत्र  देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर नरिंदर गोल्डी, बलविंदर गिल, विक्की कपूर, गुरशरण सिंह बिल्ला, सतपाल डोगरा, शक्ति कल्याण आदि भी उपस्थित थे।

आपातकाल को भारतीय राजनीति के इतिहास का काला अध्याय भी कहा जाता

चरणजीत सिंह अटवाल ने कहा कि आज से 50 साल पहले देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया था, जिसे भारतीय राजनीति के इतिहास का काला अध्याय भी कहा जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा माननीय न्यायालय के फैसले के विरुद्ध जाकर 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई, जो 21 मार्च 1977 तक लगी रही। उस दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की सिफारिश पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन देश में आपातकाल की घोषणा की थी। इसी दिन विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र देश में लोकतंत्र का गला घोंटा गया। भारतीय जनता पार्टी आज भी इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाती है। उन दिनों और जनता पर अत्याचारों को याद कर आज भी रूह काँप जाती है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे. इसे आजाद भारत का सबसे विवादास्पद दौर भी माना जाता है।

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