
अमृतसर, 22 जून :पंजाब में कोई भी प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान अब साल में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा पाएगा। इस संबंध में कैबिनेट मीटिंग में अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई है। इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेज दिया गया है। यह जानकारी चंडीगढ़ में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कैबिनेट बैठक के बाद दी। उन्होंने बताया कि पिछले 36 महीनों में यदि किसी स्कूल ने फीस में 15 फीसदी से अधिक वृद्धि की गई है तो उसे अभिभावकों को पैसा लौटाना होगा।
उन्होंने कहा कि अगर कोई स्कूल फीस 5 फीसदी बढ़ाना चाहता है, तो उसके लिए कमेटी बनाई गई है। उसके लिए स्कूलों को 6 महीने पहले आवदेन करना होगा। वहीं, स्कूल को अपना फाइनेंशियल ऑडिट करना हो । स्कूल को बताना होगा कि क्यों फीस बढ़ाई गई है। हर शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के दो महीने पहले सभी स्कूलों को तय फीस की जानकारी देनी होगी। यह नियम पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई और इंटरनेशनल बोर्ड सभी पर लागू होगा।
एडीसी पोस्ट गठित की गई
वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि मुख्यमंत्री की लोक मिलनी के दौरान होशियारपुर जिले के लोगों ने मांग उठाई थी कि दसूहा और मुकेरियां सब-डिवीजन के लिए एडीसी (अतिरिक्त उपायुक्त) का पद बनाया जाए, ताकि लोगों को अपने काम के लिए दूर न जाना पड़े। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट बैठक में दसूहा, गढ़दीवाला, मुकेरियां, तलवाड़ा और हाजीपुर क्षेत्र के लिए एक नया एडीसी पद सृजित करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा फगवाड़ा में भी एडीसी का एक नया पद बनाने को मंजूरी दी गई है।
इंडस्ट्रियों को भी राहत
वित्तमंत्री ने बताया कि पंजाब में पिछली सरकारों की तरफ से इंडस्ट्री पॉलिसी 1978, 1987, 1989, 1992, 1996 और 2003 में लागू की गई थी। इन नीतियों के तहत निवेश को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों को सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन दिए जाते थे।हालांकि, इस समय में कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं और सरकार ने उनकी सब्सिडी व प्रोत्साहन राशि रोक दी। मामला कोर्ट में पहुंच था। अब सरकार ने फैसला किया है कि पात्र कंपनियों को उनका लंबित प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा। ऐसी 99 कंपनियां हैं।
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