
अमृतसर, 18 जुलाई: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमृतसर के तत्वावधान में आयोजित विशेष लोक अदालत ने आपसी समझौते के माध्यम से विवादों के निपटारे तथा लंबे समय से लंबित मुकदमों के समाधान में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। इस विशेष लोक अदालत के लिए कुल पाँच बेंचों का गठन किया गया, जिनमें अमनदीप कौर, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अमृतसर, अमनदीप सिंह घुम्मण, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमृतसर; गगनदीप सिंह कैंथ, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमृतसर, सतविंदरजीत कौर, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अजनाला तथा सुश्री रामनदीप कौर, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बाबा बकाला साहिब की अदालतें शामिल थीं।
विशेष लोक अदालत के दौरान कुल 391 मामलों को विचारार्थ रखा गया, जिनमें से 37 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल ₹51,09,805/- की राशि का समझौता हुआ।
विशेष लोक अदालत की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक “गौरव इम्पेक्स बनाम गोल्डन ओवरसीज़” शीर्षक शिकायत का सौहार्दपूर्ण निपटारा रहा, जो 14 मई 2012 से न्यायालय में लंबित थी। यह मामला लगभग 14 वर्षों तक न्यायालय में विचाराधीन रहा और अंततः 18 जुलाई 2026 को न्यायालय के सतत प्रयासों तथा दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के सकारात्मक सहयोग से आपसी सहमति के आधार पर सुलझा लिया गया।
यह शिकायत एक व्यावसायिक लेन-देन से संबंधित थी, जिसमें आरोप था कि आरोपी फर्म ने विभिन्न चालानों के माध्यम से शिकायतकर्ता से ₹36,76,156/- मूल्य का सामान खरीदा था। आरोपी द्वारा ₹20,00,000/- का भुगतान किया गया, जबकि शेष राशि के लिए ₹5,00,000/- के दो चेक, डॉयचे बैंक, सेक्टर-18, नोएडा (उत्तर प्रदेश) पर जारी किए गए। प्रस्तुत किए जाने पर दोनों चेक 14 मार्च 2012 को “Payment Stopped by Drawer” टिप्पणी के साथ अनादृत (डिशॉनर) हो गए। विधिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
कार्यवाही के दौरान आरोपी फरार हो गया और उसे उद्घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया गया। बाद में उसकी गिरफ्तारी के उपरांत उसे न्यायालय में पेश किया गया, जिसके बाद मुकदमे की सुनवाई पुनः प्रारंभ हुई। इस दौरान न्यायालय ने लगातार दोनों पक्षों को आपसी समझौते के लिए प्रेरित किया, ताकि वर्षों से लंबित इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान हो सके।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के सहयोग एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप वार्ता सफल रही और दोनों पक्ष ₹2,50,000/- की राशि पर समझौते के लिए सहमत हो गए। आरोपी ने यह राशि शिकायतकर्ता को अदा कर दी, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता की उपस्थिति में लोक अदालत के समक्ष शिकायत वापस लेने का बयान दिया। इस प्रकार 14 वर्षों से अधिक समय से लंबित मुकदमे का सफलतापूर्वक समापन हो गया।
इस लंबे समय से लंबित विवाद का सफल समाधान लोक अदालत की मूल भावना एवं उद्देश्य को प्रतिबिंबित करता है, जिसके माध्यम से पक्षकारों को विवादों के त्वरित, किफायती, प्रभावी एवं सौहार्दपूर्ण समाधान का अवसर मिलता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमृतसर इस विशेष लोक अदालत को सफल बनाने में सभी पीठासीन अधिकारियों, अधिवक्ताओं, वादकारियों तथा न्यायालय कर्मचारियों के समर्पित योगदान की सराहना करता है तथा वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली के माध्यम से सभी नागरिकों को सुलभ एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।
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