
अमृतसर, 17 जुलाई: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से गुरुद्वारा सुधार लहर और अकाली लहर के प्रमुख नेता रहे स. तेजा सिंह समुंदरी की 100वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर आज विशेष समागम आयोजित किया गया। यह समागम एसजीपीसी कार्यालय स्थित उनकी याद में स्थापित तेजा सिंह समुंदरी हॉल में हुआ। समागम में श्री दरबार साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह, श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज, एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, दमदमी टकसाल के मुखी बाबा हरनाम सिंह खालसा, वरिष्ठ अकाली नेता बलविंदर सिंह भुंदड़ और तेजा सिंह समुंदरी के पोते व दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
श्री अखंड पाठ साहिब के भोग उपरांत हजूरी रागी जत्थों ने गुरबाणी कीर्तन किया। इसके बाद अरदास और पावन हुकमनामा लिया गया। इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि स. तेजा सिंह समुंदरी ने अपना पूरा जीवन पंथ की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा सुधार लहर के दौरान सिख योद्धाओं ने अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और सफलता हासिल कर सिख संस्थाओं को मजबूत किया।

एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि तेजा सिंह समुंदरी ने अंग्रेजी हुकूमत और गुरुद्वारा साहिबानों में चल रही मनमत के खिलाफ मजबूती से संघर्ष किया। उन्होंने रिहाई के लिए माफी मांगने की शर्त को भी स्वीकार नहीं किया और जुल्म के सामने झुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे तेजा सिंह समुंदरी के जीवन, संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेकर पंथ और समाज की सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ें।
तेजा सिंह समुंदरी के पोते तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि उन्हें अपने दादा की विरासत का हिस्सा होने परगर्व है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और विरासत से जोड़ना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान तेजा सिंह समुंदरी के परिवार के सदस्यों सहित कई प्रमुख हस्तियों को सम्मानित भी किया गया।
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