
अमृतसर, 29 मार्च :पंजाब सरकार की तरफ से एक्वायर की जाने वाली जमीन में फर्जी तरीके से अमरूदों के बाग दिखाकर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले में ईडी ने रेड कर 3.89 करोड़ कैश, मोबाइल व जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं। ईडी जालंधर की तरफ से रिकवर की गई राशि की तस्वीरों व जानकारी को शुक्रवार जनतक किया गया। आपको बता दें कि बुधवार को पंजाब के आईएएस वरूण रूजम व पटियाला के आईएएस राजेश धीमान के घर के अलावा भूपिंदर सिंह के 26 ठिकानों पर ईडी ने रेड की थी। सीनियर अधिकारियों ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि ये रेड फिरोजपुर, मोहाली, बठिंडा, बरनाला, पटियाला और चंडीगढ़ के एरिया में की गई थी। सर्च के दौरान घोटाले से जुड़े सबूतों के अलावा प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट, मोबाइल फोन और 3.89 करोड़ रुपए रिकवर किए गए हैं। टीम को मौजूदा एक्साइज कमिश्नर वरुण रूजम के घर के पीछे एक पार्क में फटे हुए कुछ दस्तावेज भी मिले थे। इन दस्तावेजों में अमरूद बाग घोटाले का जिक्र है। ईडी को शक है कि बचने के लिए इन्हें फाड़कर फेंका गया।
आईएएस की पत्नी पर लग चुके आरोप
वहीं, वरुण की पत्नी पर भी आरोप लगा चुका है कि उसने करोड़ों रुपए का मुआवजा फर्जी तरीके से हासिल किया है। इसके अलावा फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान की पत्नी भी केस में आरोपी हैं। वहीं, ईडी की टीम कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य लोगों के घर पहुंची है। ईडी काफी समय से इस केस की जांच कर रही थी। इसके तहत गमाडा से सारा रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया गया था। इसके अलावा टीमें पटियाला में आईएएस अधिकारी राजेश धीमान के सी ए घर पर टीम पहुंची।
कलेक्टर ने तैयार कराई थी मूल्यांकन रिपोर्ट
एयरपोर्ट रोड पर ग्रेटर मोहाली डेवलपमेंट अथॉरिटी की तरफ से एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा हुआ मामला है। अधिग्रहण जमीन का मुआवजा गमाडा ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के मुताबिक दिया था। उस जमीन में लगे अमरूद के पेड़ों की कीमत जमीन से अलग अदा की थी। फलदार पेड़ों की कीमत बागवानी विभाग की तरफ से निर्धारित की जाती है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण कलेक्टर ने फलदार वृक्षों वाली जमीन की एक सर्वेक्षण सूची
डायरेक्टर बागवानी को भेजकर पेड़ों की मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करवाई थी।
क्या था मामला
जमीन अधिग्रहण से पहले यहां कुछ लोगों ने अमरूदों के पौधे लगा दिए थे, लेकिन गमाडा के अधिकारियों के साथ मिलकर इनकी उम्र 4 से 5 साल दिखाई गई। इस कारण इनका मुआवजा काफी ज्यादा बना। इस तरह से कई लोगों ने मिलकर गलत तरीके से मुआवजा लिया। विजिलेंस ने इसमें आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन अदालत ने मुआवजा राशि वापस जमा करवाकर उन्हें जमानत दे दी।इस मामले में आरोपियों ने मुआवजा प्राप्त करने के लिए ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा अधिग्रहण की जाने वाली जमीन पर नियम से अधिक अमरूद के पौधे लगाए थे। आरोप है कि जिन लोगों ने जमीन पट्टे पर ली, उन लोगों ने प्रति एकड़ 2000 से 2500 पेड़ दिखाए। जो कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की प्रति एकड़ 132 पेड़ों की सिफारिश से अधिक थे। ये लोग गमाडा के अधिकारियों के साथ मिलकर पहले पता लगाते थे कि किस जमीन को एक्वायर किया जाना है। फिर वहां इसी तरह के फलों के पौधे लगाते थे। आरोप यह भी है कि इन्होंने 2018 में जमीन पट्टे पर ली थी, और तभी वहां अमरूद के पौधे लगाए। लेकिन, ज्यादा मुआवजा प्राप्त करने के लिए उन्होंने पौधों की उम्र ज्यादा दिखाई।अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर रिकॉर्ड में इन पौधों को 2016 से दिखाया गया।
करीब 137 करोड़ रुपए का था घोटाला
अमरूद बाग घोटाले का पर्दाफाश विजिलेंस ब्यूरो ने किया था। इसमें दो आईएएस अधिकारियों की पत्नी समेत 22 लोगों पर केस दर्ज किया था। इसमें राजस्व विभाग के कई अधिकारी थे। यह घोटाला करीब 137 करोड़ का था। अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के परिसरों को कवर.किया जा रहा है।.इस मामले की जांच जब विजिलेंस कर रही थी तो ईडी ने इस संबंधी सारे दस्तावेज ले लिए थे। साथ ही केस की पड़ताल की थी। हालांकि, इस मामले के कई आरोपी करोड़.रुपए अदालत में जमा करवाकर जमानत हासिल कर चुके हैं।
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