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पंजाब विधानसभा में पानी के मुद्दे पर : सदन में 6 प्रस्ताव पास किए गए

विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान।

अमृतसर,5 मई: पंजाब विधानसभा का आज पानी के मुद्दे को लेकर विशेष एक दिन का सत्र चलाया गया। आज विधानसभा सत्र में सदन में 6 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिए गए हैं। जिन में पंजाब अपने हिस्से से एक बूंद भी पानी हरियाणा को नहीं देगा। मानवता के आधार पर 4 हजार क्यूसेक पानी दे रहे, इसे जारी रखा जाएगा। BBMB केंद्र सरकार की कठपुतली बनकर रह गया है। मीटिंग में न पंजाब की बात सुनी जा रही और न ही पंजाब के हकों का ध्यान रखा जा रहा। बोर्ड का
पुनर्गठन किया जाए। सतलुज, ब्यास और रावी नदियां केवल पंजाब से बहती हैं। 1981 में जल समझौते के समय जितना पानी इन नदियों में था, अब उतना पानी नहीं रह गया है। ऐसे में इन नदियों से पानी के बंटवारे के लिए नई संधि बनाई जाए। BBMB के मीटिंग बुलाने के लिए नियम तय है। मगर, बोर्ड कानून का पालन नहीं कर रहा । गैरकानूनी तरीके से रात को मीटिंग बुलाई जा रही है। सदन निर्देश देता है कि BBMB नियमों का पालन करे।भाखड़ा डैम से किस राज्य को कितना पानी दिया जाना है, यह 1981 की जल संधि में लिखा गया है | BBMB को इसे बदलने का अधिकार नहीं है। अगर BBMB कोई फैसला लेता है, तो यह असंवैधानिक है | BBMB ऐसे फैसले लेने से खुद को रोके ।डैम सेफ्टी एक्ट- 2021 के प्रस्ताव को केंद्र सरकार वापस ले। पंजाब सरकार को यह एक्ट स्वीकार नहीं है।

पानी कोई 2-3 साल पुराना मुद्दा नहीं

विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान।

पंजाब विधानसभा में पानी के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पानी कोई 2-3 साल पुराना मुद्दा नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार शुरू से ही पंजाब को धकेलती आ रही है। उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि हरित क्रांति के दौरान पंजाब ने देश के भंडार भर दिए, लेकिन इसका पता तब चला जब हमारा भूमिगत जल खत्म हो गया और हरित क्रांति उन्हें महंगी पड़ गई। उन्होंने कहा कि चावल उनका भोजन नहीं है, लेकिन वह देश के लिए चावल बीज रहे हैं। 9 गोविंद सागर झीलों जितना पानी वह धान की एक जमीन दौरान नीचे से निकाल लेते हैं। जिस गहराई से आज मालवा में पानी निकाला जा रहा है उसे गहराई से साउदी अरब वाले तेल निकाल रहे हैं और बोरवेलों का पानी गर्म निकल रहा है।

पिछली सरकारों की गलतियों की कीमत चुकानी पड़ रही

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पिछली सरकारों की गलतियों की कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि आज उन्होंने फिर से सुए और कस्सियां को दोबारा चलाया है। आज नहरों का पानी 60 प्रतिशत से अधिक पानी का उपयोग हो चुका है और उन्होंने किसी के अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने 2014-15 में 70 प्रतिशत पानी का उपयोग किया और अब 2024-25 में 91 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रातों-रात बी.बी.एम. की बैठक बुलाई गई और पंजाब के साथ धक्का किया गया। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि वह किसके साथ है। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर जुबानी हमला करते हुए कहा कि पानी का रक्षक तो भाजपा में है।

प्रताप सिंह बाजवा के साथ तीखी बहस

सदन में बोलते समय मुख्यमंत्री मान की प्रताप सिंह बाजवा से तीखी बहस हो गई। मुख्यमंत्री ने जब एक कहावत का हवाला देकर प्रताप सिंह बाजवा पर निशाना साधा तो प्रताप सिंह बाजवा भड़क गए और कहने लगे कि सदन में पानी पर चर्चा होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर उन्हें पानी पर बोलने दें तो बोलूं। 

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