
अमृतसर, 4 फरवरी(राजन गुप्ता): विवादों में दिख रहे अमृतसर वाॉल्ड सिटी के विकास के लिए नगर निगम द्वारा लगाए गए लगभग 417. 82 करोड़ रुपयो के 2 टेंडर को नगर निगम रद्द करने जा रही है। टेंडर रद्द करने के लिए मौखिक निर्देश दिया है। जल्द ही लिखित में ऑर्डर जारी हो जाएगा।नगर निगम द्वारा अमृतसर वाॉल्ड सिटी के विकास के लिए 206,51,42444 रुपयो का एक टेंडर और 211,31,05 982 रुपयो का दूसरा टेंडर 27 नवंबर 2025 को जारी किया गया था। इन दोनों टेंडरों को 23 दिसंबर 2025 को खोला गया। दोनों टेंडरो में सिर्फ एक पार्टी ने बिड भरी है।नगर निगम की टेंडर कमेटी द्वारा इन दोनों टेंडरों की टेक्निकल इवेलुएशन की जा रही थी। पहले निगम की टेंडर कमेटी द्वारा इन दोनों टेंडरों की टेक्निकल इवैल्युएशन के लिए फाइल चंडीगढ़ लोकल बॉडीज विभाग की चीफ इंजीनियर कमेटी को भेजी गई थी। चीफ इंजीनियर कमेटी द्वारा इस फाइल पर अपने रिमार्क्स लिखकर इसे वापस नगर निगम अमृतसर को लौटा दिया गया था।
इनएंटीसिपेशन अप्रूवल ऑफ़ द हाउस की मंजूरी ली गई
नगर निगम द्वारा इतने बड़े-बड़े दो टेंडर लगाने के लिए इन एंटीसिपेशन अप्रूवल ऑफ़ द हाउस की मंजूरी ली गई। लगभग 417.82 करोड़ रुपए के टेंडर लगाने के लिए नगर निगम के जनरल हाउस की मीटिंग में डिस्कशन करनी चाहिए थी। नगर निगम जनरल हाउस में अमृतसर शहर के 85 पार्षद और जिला अमृतसर के 7 विधायक सदस्य हैं। अगर निगम जनरल हाउस के सदस्यों से बहुमत से मंजूरी ली जाती, तब ही विकास कार्यों के इतने बड़े-बड़े दो टेंडर लगवाने चाहिए थे। अलबत्ता नगर निगम अधिकारियों ने इन दोनों टेंडरों की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डी पी आर) बनवाकर नगर निगम मेयर जितेंद्र सिंह भाटिया से इन दोनों टेंडरों की इन एंटीसिपेशन अप्रूवल ऑफ़ द हाउस मंजूरी लेकर टेंडर वेबसाइट में अपलोड कर दिए गए। बता दे कि इन एंटीसिपेशन अप्रूवल ऑफ़ द हाउस का मतलब होता है कि जनरल हाउस की बहुमत से मंजूरी लेने की जिम्मेदारी मेयर लेते है।
दोनों टेंडरों के लिए नगर निगम के पास कोई फंड नहीं था
बता दे कि नगर निगम के पास इन दो टैंटरों को लेकर कोई भी राशि उपलब्ध ना होने के बावजूद इन एंटीसिपेशन की मंजूरी से ही टेंडर लगा दिए गए। यह एक बहुत ही बड़ी जांच का विषय है। इन दोनों टेंडरों के लिए केंद्र और पंजाब सरकार से फंड देने के लिए कोई भी फाइनेंस मंजूरी का नगर निगम को पत्र जारी नहीं किया गया था। अलबत्ता नगर निगम द्वारा इतनी बड़ी राशि को अपने ही जनरल फंड से कैसे खर्च कर सकती थी। नगर निगम की इस वक्त वित्तीय स्थिति बहुत ही खराब चल रही है। नगर निगम को वेतन देने के लिए भी जीएसटी की राशि आने का इंतजार किया जाता है। नगर निगम द्वारा पहले से करवाए जा रहे विकास कार्यों के एवज में करोड़ रुपयो का भुगतान नहीं हो पा रहा है। जिस पर कुछ ठेकेदारों द्वारा मंजूर हुए विकास कार्य को रोक दिया गया है।नगर निगम द्वारा इन दोनों टेंडरों की डीपीआर बनवाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। यह भी एक जांच का विषय है।
विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर पंजाब सरकार सड़कों में तोड़फोड़ नहीं चाहती
पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर वाॉल्ड सिटी में पंजाब सरकार भी सड़कों में किसी तरह की भी तोड़फोड़ नहीं चाहती थी। इन दोनों टेंडरों की प्रक्रिया को पूरा करते-करते लगभग डेढ़ माह का समय और लग जाना था। निगम की वित्त एंड ठेका कमेटी की मंजूरी के इन दोनों टेंडरों का वर्क आर्डर जारी होना था। इन दोनों टेंडरों की समय 18 महीनो की थी। ठेकेदार द्वारा वाॉल्ड सिटी की सड़कों और गलियों में सीवरेज और वाटर सप्लाई डालने के लिए तोड़फोड़ की जानी थी। इतनी बड़ी राशि का फंड न होने पर तोड़फोड़ के बाद कार्य बंद हो जाना था। जिससे विधानसभा चुनाव में लोगों के बीच गलत असर जाना था।
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