
अमृतसर, 16 जून: सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अमृतसर, गुरु नानक देव अस्पताल तथा बीबी नानकी मातृ एवं शिशु देखभाल अस्पताल ने बाल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अनेक दुर्लभ जन्मजात विकृतियों से पीड़ित एक नवजात शिशु की अत्यंत जटिल वक्ष शल्य चिकित्सा (थोरेसिक सर्जरी) सफलतापूर्वक संपन्न की है।
एक उल्लेखनीय चिकित्सीय उपलब्धि के रूप में, गर्भावस्था के दौरान जांच में जन्मजात पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन (सी.पी.ए.एम.) के साथ-साथ डेक्स्ट्रोकार्डिया और साइटस इनवर्सस टोटालिस से पीड़ित पाए गए एक नवजात शिशु का सफलतापूर्वक मेजर थोरेसिक ऑपरेशन किया गया, जिसमें दाएं फेफड़े के मध्य खंड (राइट मिडिल लोब) को शल्य चिकित्सा द्वारा हटाया गया। मात्र 2 किलोग्राम वजन वाले इस नवजात ने ऑपरेशन के बाद अच्छी तरह स्वास्थ्य लाभ किया और 10 दिनों के उपचार के उपरांत उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पिछले तीन दिनों से शिशु घर पर स्वस्थ एवं स्थिर अवस्था में है।
इस अत्यंत जटिल शल्य चिकित्सा को बाल शल्य चिकित्सा विभाग की सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुरिष्टा के. राणा तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. अक्ष रारा द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. वीना छत्राथ के नेतृत्व में संकाय सदस्यों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों की टीम ने भी इस प्रक्रिया की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह जन्मजात विकृति नियमित प्रसवपूर्व अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान पहचान में आई थी। संस्थान में बाल शल्य चिकित्सक द्वारा गर्भावस्था के दौरान ही किए गए मूल्यांकन से जन्म के बाद समय पर हस्तक्षेप की विस्तृत योजना तैयार की जा सकी। जन्म के उपरांत रेडियोलॉजिकल जांचों से निदान की पुष्टि होने के बाद शल्य चिकित्सा की सावधानीपूर्वक योजना बनाकर उसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
नवजात को बाल चिकित्सा इकाई-2 में बाल रोग विभाग की डॉ. निर्मलजीत कौर तथा बाल शल्य चिकित्सा विभाग की डॉ. सुरिष्टा के. राणा की देखरेख में ऑपरेशन से पूर्व और ऑपरेशन के बाद समग्र चिकित्सा देखभाल प्रदान की गई। ऑपरेशन के एक दिन के भीतर ही शिशु को वेंटिलेटर सहायता से मुक्त कर दिया गया तथा उसकी श्वास नली से ट्यूब निकाल दी गई। ऑपरेशन के दूसरे दिन छाती की नली भी हटा दी गई और इसके तुरंत बाद उसे दूध पिलाना शुरू कर दिया गया। शिशु ने लगातार स्वास्थ्य लाभ किया, पूर्ण आहार सहन किया तथा 10 दिनों के भीतर ऑक्सीजन सहायता से भी मुक्त हो गया। इसके पश्चात उसे स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ. सुरिष्टा के. राणा ने कहा कि नवजातों और बच्चों की जटिल शल्य चिकित्सा के दौरान उनके जीवन की रक्षा करना बाल शल्य चिकित्सा विभाग, बाल रोग विभाग, एनेस्थीसिया टीम, ऑपरेशन थियेटर स्टाफ तथा बाल वार्ड स्टाफ के समन्वित बहु-विषयक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान लेवल-2 अल्ट्रासोनोग्राफी के माध्यम से जन्मजात विकृतियों का समय पर पता लगना तथा बाल शल्य चिकित्सक के पास शीघ्र रेफरल ऐसे जटिल ऑपरेशनों की तैयारी और सफलता की संभावनाओं को काफी बढ़ा देता है।
डॉ. सुरिष्टा के. राणा ने संस्थान के निदेशक-प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, चिकित्सा अधीक्षक तथा सभी संकाय सदस्यों का निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया, जिसके कारण जीएमसी अमृतसर में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सका है।
यह उपलब्धि पंजाब में विशेषीकृत बाल शल्य चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है तथा बच्चों और उनके परिवारों को उनके घर के निकट ही उन्नत एवं जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जीएमसी अमृतसर की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।
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