
अमृतसर,28 जुलाई:प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी रोकने, फीस को रेगुलेट करने और स्कूलों पर कार्रवाई करने का मुख्य अधिकार राज्य सरकारों के पास है। चाहे स्कूल सीबीएसई से जुड़ा ही क्यों न हों। यह जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राजकुमार चब्बेवाल के सवाल के जवाब में दी है।
वहीं, यदि किसी अभिभावक को स्कूल से जुड़ी कोई शिकायत है, तो उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी ,राज्य की फीस रेगुलेटरी कमेटी या सीबीएसई के आधिकारिक शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है।
हाल ही में पंजाब सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर नियम बनाए हैं। पंजाब में 5% फीस ही स्कूल बढ़ा सकते हैं। हालांकि, स्कूल इस आदेश के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गए हैं। आज (28 जुलाई) को इस पर सुनवाई हुई। जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 4 अगस्त दी है।
स्कूलों ने हाईकोर्ट में यह तर्क दिया
प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर राज्य सरकार के नए अध्यादेश के खिलाफ स्कूल संचालक हाईकोर्ट पहुंचे। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ
पंजाब ने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दी है। याचिका पर सुनवाई डबल बेंच ने शुरू कर दी है।
स्कूलों का कहना है कि साल में सिर्फ 5% फीस बढ़ाने की छूट बहुत कम है। इससे टीचरों की सैलरी बढ़ाना, नए कमरे – बेंच बनवाना और स्कूल का खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट में तो 8 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की अनुमति स्कूल मैनेजमेंट को मिली है।
स्कूल संचालकों को सबसे बड़ा एतराजा पुरानी फीस वापस करने पर है। उनका कहना है कि सरकार कह रही है कि जिन्होंने पिछले 3 सालों में 15% से ज्यादा फीस बढ़ाई है, वे पैसा अभिभावकों को वापस करें या आगे की फीस में काटें। स्कूल वालों का कहना है कि यह पैसा तो पहले ही खर्च हो चुका है। अब इसे लौटाना मुमकिन नहीं ।
स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार कह रही है कि हर तरह के चार्जेज को फीस माना जाएगा। उनका कहना है कि बस का किराया, कंप्यूटर फीस, खेलकूद और डेवलपमेंट का पैसा भी फीस में जोड़ देने से स्कूलों का कामकाज ठप पड़ जाएगा।
स्कूल संचालकों ने कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि सरकार ने थोड़ी सी स्कूल भी गलती होने पर भारी जुर्माना लगाने और मान्यता रद्द करने की धमकी दी है, जिससे स्कूल मालिक डरे हुए हैं।
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