
अमृतसर, 10 अगस्त :पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन सरकार ने स्कूलों का फीस रेगुलेशन बिल पास करवा लिया। इस बिल के पास होने से स्कूलों पर पिछले 3 सालों में अभिभावकों से लिए 5% से ज्यादा बढ़ोतरी वाले पैसे वापस करने की तलवार लटक गई है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में पंजाब राज्य आउटसोर्स्ट पर्सनल बिल, 2026 पेश किया। उन्होंने कहा इस सर्विस के लिए हमने मुलाजिमों को दो श्रेणी में बांटा है।मुश्किल काम करने वाले मुलाजिमों के लिए 3 साल की शर्त रखी गई। इसमें बिजली कर्मी व सीवर कर्मी शामिल हैं। जबकि दूसरी श्रेणी में 5 साल से कार्यरत मुलाजिमों को रखा गया है। इन सब मुलाजिमों को सरकार सीधे कांट्रेक्ट पर लेगी। इससे करीब 28 हजार आउटसोर्स्ट कर्मचारी सीधे सरकार के अंडर में आ गए हैं।
विपक्ष वाले फालतू चिंता न करें, धन्यवाद करें
सीएम भगवंत मान ने कहा- इस बिल पर गवर्नर साहब ने पहले ही साइन कर दिया था। राज्य में 7800 के करीब स्कूल हैं। इनमें 32 लाख बच्चे पढ़ते हैं । हाल पूछकर देखो, जिनके बच्चे प्राइवेट में पढ़ते हैं। कोई न कोई बहाना स्कूल वाले बनाकर रखते हैं। यह बिल जरूरी है। विरोधियों को बोलने का डेमोक्रेटिक राइट है, लेकिन फालतू या भविष्य की चिंता न करें। धन्यवाद कर दो कि बिल लेकर आए ।
पढ़ाई चोरी नहीं हो सकती
पंजाब सीएम भगवंत मान ने फीस रेगुलेशन बिल पर कहा कि आज के समय उसे सेठ माना जाता है, जिसके बच्चे पढ़े-लिखे होते। उनके पास क्वालिटी एजुकेशन होती। पहले जमीन, प्लॉट, दुकान या शोरूम वालों को बड़ा माना जाता था। अब बच्चों की पढ़ाई व परवरिश कहां से मिली, यह देखा जाता है। पढ़ाई चोरी नहीं हो सकती है।
सरकारी स्कूल दलिया खिलाने वाली इमारतें बनकर रह गई
सीएम ने कहा- पढ़ाई में भी गरीबों की किताबें अलग थीं, अमीरों की किताबें और थीं। गरीबों और अमीरों स्कूलों में टीचर भी अलग थे। गरीबों की पढ़ाई तो गाइडों पर निशानी लगाने तक सीमित रह गई थी। केवल मजबूर माता-पिता बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाते थे। सरकारी स्कूल दलिया खिलाने वाली इमारतें बनकर रह गई थीं।
सीएम भगवंत मान ने कहा कि आउटसोर्स एक गंभीर विषय है। आउटसोर्स जो मुलाजिम हैं, उन्हें सरकार अपने कांट्रैक्ट पर इस बिल के माध्यम से लेकर आएगी। बहुत सारे नौजवान हमें मिलते हैं। उनका बहुत शोषण होता है। कागजों में वेतन कुछ और है, मिलता कुछ और है। सरकार से तो पेमेंट और होती है। काफी शिकायतें हमें आती थीं। काफी सोच-विचारकर बिल पेश किया। इसमें ग्रुप सी व डी के उन कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा, जो जरूरी सेवाओं में काम कर रहे हैं।
इनमें बिजली बोर्ड, फायर सेवाएं शामिल हैं। यह कुल मुलाजिम 28 हजार हैं, जिन्हें फायदा होगा। इसके लिए योग्यता पूरी करने का एक साल का समय रहेगा। 3 साल की समय अवधि रहेगी।
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