
अमृतसर,9 अक्टूबर (राजन) : नगर निगम अमृतसर द्वारा विकास कार्यों के लिए आई ग्रांट की राशि कूड़ा करकट और साफ सफाई करने वाले कंपनियों को दे दी गई है। नगर निगम को इस वक्त विकास कार्य करवाने वाली कंपनियों और ठेकेदारों को करोड़ों रुपया बकाया देना
है। बकाया राशि न मिलने पर नगर निगम के ठेकेदारों द्वारा विकास कार्य ठप्प कर दिए गए हैं। जिस शहर में कई क्षेत्रों में टूटी हुई सड़कों और अन्य विकास कार्य अधूरे रहने से शहर वासियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर ठेकेदार कंपनियों द्वारा नगर निगम अधिकारियों को साफ तौर पर कह दिया गया है,जब तक उनका बकाया भुगतान नहीं होता तब तक कोई भी
विकास कार्य शुरू नहीं करवाया जाएगा। इसके अलावा नगर निगम के लगभग दो दर्जन से अधिक छोटे ठेकेदारों ने भी नगर निगम के जनरल विकास के कार्य बिल्कुल ही बंद कर दिए गए हैं। इन सभी छोटे ठेकेदारों के भी नगर निगम में करोड़ों रुपए बकाया देने हैं।
इस इस ग्रांट से निगम को आया था फंड
ठेकेदार कंपनी द्वारा आरोप लगाया जा रहा है, उनको जारी किए गए विकास कार्यों के टेंडर की ग्रांट राशि नगर निगम द्वारा कथित तौर पर कूड़ा करकट एकत्रित करने वाली कंपनियों को दे दी गई है। जिसमें मुख्य तौर पर केंद्र सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फारकैपिटल इन्वेस्टमेंट (सासकी) के लगभग 23 करोड़ रूपया, एन कैप का लगभग 9 करोड़ रूपया और रोड कटिंग का लगभग 8 करोड़ रूपया जो कुल लगभग 40 करोड़ रुपए की राशि शामिल है। इस राशि से शहर की सड़के और गलियां बनाई जानी थी। इसके अलावा नगर निगम द्वारा केंद्र सरकार की सासकी ग्रांट, केंद्र सरकार और पंजाब सरकार की विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपए की ग्रांट
नगर निगम अमृतसर द्वारा अपने बैंक के अकाउंटो में ट्रांसफर कर लिया गया था।
इन इन कंपनियों को विकास कार्यों की राशि दे दी गई
नगर निगम द्वारा विकास कार्यों के लिए आई गई राशि विकास कार्य करवाने वाली बड़ी कंपनियों को न देकर साफ सफाई करने वाली कंपनियों को दे दिया गया। अमृतसर शहर की इस वक्त डोर टू रोड पूरा कलेक्शन दो कंपनी द्वारा की जा रही है। इसके साथ-साथ शहर की मैकेनिकल स्वीपिंग भी दो कंपनी द्वारा की जा रही है। भगतावाला कूड़े के डंप में एक कंपनी द्वारा बायोरेमेडीएशन करवाई जा रही है।
जीएसटी की राशि आने पर ही निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन जारी कर रहा
दिवाली से पहले ही नगर निगम का दिवाला निकल चुका है। नगर निगम को अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन देना भी कठिन हो रहा है। निगम को जीएसटी की राशि आने पर ही वेतन दिया जा रहा है। निगम द्वारा अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को महीने की 20 तारीख के बाद ही वेतन दिया जा रहा है।
एकत्रित प्रॉपर्टी टैक्स से उम्मीद जागी थी
नगर निगम को सितंबर महीने में लगभग 25 करोड़ रुपया प्रॉपर्टी टैक्स एकत्रित हुआ है। इसके अलावा भी जनरल इनकम से निगम को फंड आया है। नगर निगम के ठेकेदारों को एकत्रित हुए प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य विभागों की इनकम से भुगतान होने की उम्मीद जगी थी। लगभग 30 करोड रुपए की नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य विभागों से आई आमदनी नगर निगम के बैंकों में मौजूद है। नगर निगम द्वारा पहले विकास कार्यों की आई ग्रांट अन्य कार्यों पर खर्च कर ली गई। अब नगर निगम के एक्ट के अनुसार खर्च की गई ग्रांट को नगर निगम की आई इनकम के साथ जोड़ा जा सकता है। जिससे ठेकेदारों का भुगतान होकर अधूरे पड़े विकास कार्य शुरू हो सकते हैं। इस संबंध में जब नगर निगम अधिकारियों और नगर निगम के वित्तीय अधिकारियों के साथ संपर्क किया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सिर्फ यही कहा गया कि यह सारा अधिकार क्षेत्र नगर निगम कमिश्नर का है।
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