
अमृतसर, 3 जुलाई: पंजाब कांग्रेस में टूट के आसार बढ़ रहे हैं। गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा गुपचुप दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान वे भाजपा के राज्यसभा सांसद तरूण चुघ के साथ नजर आए। शाह से मिलने के बाद रंधावा ने कहा- पंजाब कांग्रेस के हालात के बारे में चन्नी व राजा वडिंग से पूछें। इस तरह की नौबत नहीं आनी चाहिए थी। इतनी मीटिंग करने के बाद भी यह स्थिति आ गई, दुर्भाग्यपूर्ण है।
सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ मेरी मीटिंग को मीडिया के कुछ हिस्सों द्वारा दिए जा रहे राजनीतिक नज़रिए का खंडन करता हूँ।पंजाब राज्य में बिगड़ते कानून और व्यवस्था पर मेरे रिप्रेजेंटेशन के सिलसिले में आज मीटिंग पहले से तय थी।
इधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज पूर्व सीएम और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने मोर्चाखोल दिया है। उन्होंने अपने घर मोरिंडा में कांग्रेस नेताओं की इमरजेंसी मीटिंग बुला ली। इसमें 3 मौजूदा विधायक समेत 26 नेता शामिल हुए। चन्नी की नेताओं से मीटिंग जारी है। कांग्रेस आलाकमान ने लुधियाना सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का प्रदेश कांग्रेस प्रमुख का पद बरकरार रखा है। इस फैसले से नेताओं में नाराजगी है। फरवरी 2027 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं।
चन्नी की मीटिंग में ये नेता पहुंचे
चन्नी के बुलावे पर विधायक तृप्त राजिंदर बाजवा, बरनाला के विधायक काला ढिल्लों, कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, गुरकीरत कोटली, पूर्व विधायक गुरप्रीत कांगड़, नाजर सिंह मानशाहिया, पूर्व विधायक परमिंदर सिंह पिंकी, दविंदर सिंह घुबाया, इंद्रबीर सिंह बुलारिया, लखबीर लक्खा, तरसेम डीसी, दर्शन बराड़, हरमिंदर सिंह गिल, मदनलाल जलालपुर, यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लो, कमलजीत कड़वल और पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक, पूर्व विधायक जोगगिंदर पाल, दिनेश बस्सी, दलबीर गोल्डी, पूर्व विधायक पिरमल सिंह और सिद्धू मूसेवाला के पिता
बलकौर सिंह चन्नी के घर पहुंचे।
कांग्रेस में बगावत से जुड़े नेताओं के बयान
मीटिंग में शामिल विधायक तृप्त राजिंदर बाजवा ने कहा कि सभी नेता और वर्कर्स यहां चन्नी के पास आए थे और उन्हें कहा है कि वो हाईकमान से बात करें। वो चाहते हैं पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने। हाईकमान से हमारी कोई लड़ाई नहीं है। जो फैसला लिया गया है उससे नाराजगी है। वडिंग प्रधान मंजूरी नहीं।हाईकमान इस फैसले को रिकंसीडर करे ।
चन्नी अपने समर्थक नेताओं के साथ विचार विमर्श करके बड़ा फैसला ले सकते हैं। मीटिंग में पहुंचे पूर्व विधायक दर्शन बराड़ ने कहा कि अगर चन्नी को प्रदेश प्रमुख नहीं बनाया तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकती । चरणजीत चन्नी का नाम चुनाव से पहले प्रदेश में कांग्रेस प्रमुख पद के लिए फाइनल था, लेकिन अचानक इसे बदलते हुए अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को इस पद पर बरकरार रखा गया।
चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बना दिया गया। हालांकि, चन्नी इससे नाराज हो गए और उन्होंने कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद तक नहीं किया । चन्नी के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- प्रदेश प्रमुख न बनाए जाने से चन्नी बहुत खफा हैं और अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का फैसला कर दिया है। वह शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं।
पूर्व विधायक तरसेम डीसी ने कहा कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के प्रदेश अध्यक्ष रहते कांग्रेस सरकार नहीं बना सकती। पंजाब के लोग चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। चन्नी ने मुझे मीटिंग में नहीं बुलाया था। मुझे एजेंडे का पता ही नहीं । चन्नी जो मीडिया ब्रीफ करेंगे, उससे पता चलेगा कि बैठक में क्या हुआ ।
पूर्व विधायक कुलदीप सिंह वैद ने कहा कि हाईकमान ने जो फैसला दिया है, सभी नेताओं को उसे मानना चाहिए। नए वर्किंग प्रधान बनाए संगत सिंह गिलजियां ने कहा- अजय माकन की कमेटी ने जो राय दी थी उस पर फैसला नहीं लिया गया। अजय माकन की रिपोर्ट में चन्नी का नाम सबसे ऊपर था। चन्नी के घर मुझे बुलाया गया था, लेकिन मैं नहीं गया। मैं पार्टी के साथ हूं।
चन्नी से मीटिंग के बाद बरिंदर ढिल्लों ने कहा कि सीनियर नेताओं की कमेटी बना दी है। बैठक में साफ हो गया कि लोगों की भावना थी वो फैसलों में रिफलेक्ट नहीं हुई।
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