
अमृतसर, 31 अगस्त: अमृतसर की कचहरी में आपराधिक मामलों में जमानत भरने वाले गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो चुके हैं। चार गिरोह के डेढ़ दर्जन से ज्यादा सदस्यों कचहरी और उसके आसपास अपने ठिकाने बना लिए हैं। चुपचाप कानून की नाक तले उनका धंधा चल रहा है। इसी जगह पर सेशन जज से लेकर डीसी, पुलिस कमिश्नर, एसएसपी और एससपी (विजिलेंस) अफसर भी बैठते हैं।
शनिवार को फर्जी जमानत भरने वाले गिरोह के सुखचैन सिंह और हीरा सिंह की धरपकड़ की गई तो उन्होंने कई राज खोले है। पुलिस को आशंका है कि आरोपितों ने दो दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामलों में जमानत के लिए दस्तावेज तैयार करवाए और फर्जी लोग दिखाकर उन्हें तस्दीक भी कराया।
गिरोह के सदस्य जिन्हें जानते भी नहीं हैं उनकी जमानत करवा देते हैं। जमानत पर जेल से छूटने के बाद आरोपी फरार हो जाते हैं और इस तरह के मुकदमें बाद में पुलिस और कोर्ट के लिए सिरदर्द बनते है। छोटे से छोटे और बड़े से बड़े आपराधिक मामलों में उनका रेट तय है। डील करवाने वाले कचहरी परिसर में काम करने वाले कुछ क्लर्क और मुंशी हैं।यह गिरोह पहले कचहरी में खुलेआम घूमते थे, लेकिन कोर्ट की सख्ती के कारण इन्हें यहां से भगा दिया गया।अब कुछ दिनों से यह गिरोह कचहरी और इसके आसपास दोबारा से एक्टिव होने लगे हैं। हालांकि कानून के कसे गए शिकंजे के कारण उन्होंने काम छिपकर करना आरंभ किया था।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों पर जमानत करवाकर भागे एक केस में अभी तक जांच जारी है। चेक बाउंस, गबन और धोखाधड़ी के एक मामले में जमानत.करवा कर भागे दिल्ली मुखर्जी नगर के बलजिंदर सिंह, लुधियाना के हरबंस सिंह मदन लाल का आज तक पता नहीं लग सका है। उक्त आरोपितों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में केस दर्ज है।
सिविल लाइन थाने की पुलिस ने साल 2022 में कोर्ट के आदेश पर एफआइआर नंबर 254 दर्ज कर छह आरोपियो को नामजद किया था। सभी ने फर्जी जमानत भरे थे । इससे पहले होशियारपुर पुलिस ने भी साल 2018 में इसी तरह का केस.दर्ज कर अमृतसर और होशियारपुर के आठ लोगों को गिरफ्तार किया था | आज तक इस केस में एक व्यक्ति को ही गिरफ्तार किया गया था।
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