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पंजाब के 2 आईएएस और एक आईएफएस  अधिकारी समेत अतिरिक्त चीफ सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी हाईकोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया

गांव बड़ी करौरां और नाड़ा की जमीन का दृश्य।

अमृतसर,12 अक्टूबर(राजन):पंजाब के 2 आईएएस और एक आईएफएस (इंडियन फोरेस्ट सर्विसेस)अधिकारी समेत अतिरिक्त चीफ सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी को हाईकोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया है। हाईकोर्ट ने आठ साल पुराने मामले में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी कम फाइनेंस कमिश्नर विकास गर्ग, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट मोहाली रमाकांत मिश्रा और लोकल गवर्नमेंट विभाग के प्रधान सचिव अजॉय शर्मा को दोषी करार दिया है।जानकारी के अनुसार कोर्ट ने इन अधिकारियों को दोषी.करार देने के साथ-साथ 20 नवंबर तक का समय भी दिया है। 20 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई तक कार्रवाई नहीं की गई तो इन्हें सजा सुना दी जाएगी। मामला ग्राम पंचायत बड़ी करोरां की याचिका से जुड़ा है। 2010 में गांव बड़ी करौरां और नाड़ा की 1092 एकड़ जमीन को पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट से डी-लिस्ट किया गया था। साथ ही शर्त लगा दी गई थी कि यहां कोई व्यावसायिक गतिविधि या कंस्ट्रक्शन नहीं किया जाएगा।

पूरा मामला यह हैं

बड़ी करौरां गांव की जमीन को लेकर मामला तकरीबन 8 साल पहले हाईकोर्ट पहुंचा था। पंचायत की अवमानना.याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई शुरू की थी। हाईकोर्ट ने वन भूमि चिन्हित कर बाकी जमीन से वन भूमि संबंधी नोटिफिकेशन रद्द करने का आदेश दिया.था, ताकि करौरां और नाडा क्षेत्र का सुनियोजित विकास हो सके। इसके बावजूद सरकार ने कोई ठोस फैसला नहीं.लिया। इसी पर पंचायत ने अवमानना याचिका दायर की थी । पंचायत ने राज्य के मुख्य सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की मांग की थी। सुनवाई के दौरान याची ने आरोप लगाया कि.सरकार इस मामले में जानबूझ कर देरी कर रही है। सरकार जल्द से जल्द यहां की वन भूमि तय करे ताकि स्थानीय निवासियों को बिजली, पानी और सीवरेज की मूलभूत सविधाएं मिल सकें।

पंजाब सरकार लगाई थी फटकार लगाई

इस मामले में हाईकोर्ट ने बार-बार पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए आदेशों की अवमानना न करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट के आदेशों के तहत ही यहां डिमार्केशन का काम होना चाहिए था। कोर्ट ने कहा था कि डिमार्केशन की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए ताकि वन व गैर वन इलाके की पहचान की जा सके और गैर वन भूमि के दायरे में आती जगहों पर विकास कार्यों को पूरा किया जा सके। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

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