
अमृतसर, 31 अक्टूबर(राजन): डिप्टी कमिश्नर अमृतसर दलविंदरजीत सिंह ने आज ब्लॉक चोगावां, हरशा छीना और अजनाला के विभिन्न गांवों लोपोके, सारंगड़ा, भीलोवाली, कक्कड़, चमियारी, कुरालियां, थोबा और कुक्कड़ांवाला का दौरा कर पराली प्रबंधन के प्रबंधों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों के खेतों में जाकर पराली के उचित प्रबंधन और संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का निरीक्षण किया।

इस दौरान डीसी ने गांव थोबा के किसान हरि सिंह के खेतों का दौरा किया और बेलरों के माध्यम से एकत्रित की गई पराली के भंडारण एवं प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा उन्होंने सुपर सीडर की सहायता से पराली को खेतों में ही मिट्टी में मिलाकर की जा रही गेहूं की बिजाई का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने पर किसान के प्रयासों की सराहना की।
किसानों और बेलर संचालकों से बातचीत करते हुए उपायुक्त ने अपील की कि धान की कटाई के बाद पराली को आग न लगाई जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के लिए किसानों को आवश्यक कृषि मशीनरी उपलब्ध करवाई गई है, जिसका उपयोग करके इन-सीटू और एक्स-सीटू विधियों के माध्यम से पराली का उचित प्रबंधन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से न केवल मिट्टी की सेहत और उपजाऊ शक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ता है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बेलर संचालकों द्वारा एकत्रित की गई पराली के डंप स्थलों का भी दौरा किया और कहा कि पंजाब सरकार इन डंप स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इनके उचित प्रबंधन के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
इस अवसर पर मुख्य कृषि अधिकारी अमृतसर डॉ. अमरजीत सिंह दोसांझ ने किसानों से अपील की कि वे पराली को खेतों में ही मिट्टी में मिलाने को प्राथमिकता दें, क्योंकि इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और मिट्टी की सेहत में सुधार होता है।
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