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52.80 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप , हाईकोर्ट ने सख्त आर्डर किए जारी : सात ट्रस्ट अधिकारियों की सस्पेंशन पर लगा स्टे

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट अमृतसर ऑफिस की तस्वीर।

अमृतसर, 14 जनवरी (राजन):पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के 52.80 करोड़ के टैंडर में गड़बड़ी पर सस्पेंड 7 अफसरों की सस्पेंशन पर स्टे लगा दिया है। अब ट्रस्ट के सातों अधिकारी हाई कोर्ट से स्टे मिलने के कारण  फिलहाल इंप्रूवमेंट ट्रस्ट अमृतसर में कार्य करेंगे।मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को होगी। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस ने टेंडर में कथित गड़बड़ी आरोप पर सख्त आर्डर जारी किए हैं। इस टेंडर में शामिल सीगल इंडिया कंपनी द्वारा चीफ सेक्रेट्री पंजाब सरकार को शिकायत करने पर चीफ सेक्रेटरी ने इसकी जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर अमृतसर को निर्देश दिए थे। डीसी अमृतसर ने एडीसी डवलपमेंट शहरी के नेतृत्व में 4 मेंबरी जांच कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में टेंडर की टेक्निकल इवेलुएशन करने के लिए कोई भी तकनीकी अधिकारी शामिल नहीं था।इस कमेटी में एडीसी चेयरपर्सन, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी एक्सईएन वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन और डीसीएफए मेंबर थे। मगर कमेटी में टेंडर को ई-वैल्यूट करने को कोई टेक्निकल अफसर (इंजीनियर) नहीं था।

अफसर को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया

जांच अफसर ने सस्पेंड किए गए किसी भी अफसर को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया और जांच
रिपोर्ट चंडीगढ़ भेज दी। वहीं, सेक्रेटरी लोकल बॉडीज ने भी ट्रस्ट अफसरों का पक्ष सुनने की बजाय सीधे सस्पेंड कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन अनुसार टेक्निकल बिड एवैल्यूएशन के बाद कोई अन्य डॉक्यूमेंट नहीं लग सकता

लोकल बॉडीज विभाग सेक्रेटरी ने जांच को 5 मेंबरी टेक्निकल कमेटी बनाई थी। सेक्रेटरी  द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया कि ट्रस्ट के पांच मेंबरी टेक्निकल कमेटी द्वारा इस टेंडर की टेक्निकल रिवैल्युएशन करें। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार टेक्निकल विद एवैल्यूएशन क्वालीफाई हो जाने के उपरांत फाइनेंशियल बिड खुल जाती है और इसके उपरांत दोबारा टेक्निकल बिड एवैल्यूएशन के लिए कोई भी अन्य डॉक्यूमेंट नहीं लग सकता है। जिस कारण नई बनी पांच मेंबरी अधिकारियों की कमेटी ने इस टेंडर को खोला ही नहीं है। क्योंकि नई बनी अधिकारियों की कमेटी इस टेंडर की रिवैल्युएशन करके अगर किसी भी पार्टी के नए डॉक्यूमेंट लेती है तो कंटेंप्ट ऑफ़ सुप्रीम कोर्ट होगा। उन अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।

इस टेंडर का मामला पहले भी हाईकोर्ट में

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के 52.80 करोड़ रुपयो के टेंडर का मामला पहले ही हाईकोर्ट में है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा इस
टेंडर की फाइनेंशियल बिड बीते 18 दिसंबर 2025 को ओपन होने पर शर्मा कांट्रेक्टर ने 1.08% का लेस देकर एच-1 बिडर बनी थी। वहीं, सीगल इंडिया लिमिटेड व गणेश कार्तिकय कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के डाक्यूमेंट्स पूरे नहीं होने व टेक्निकल खामी बताकर फाइनेंशियल बिड से पहले ही बाहर कर दिया गया था। गणेश कार्तिकय कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पहले से ही इस टेंडर को लेकर याचिका हाई कोर्ट के डबल बेंच में दायर कर दी गई थी। हाई कोर्ट की डबल बेंच की न्यायाधीश लीजा गिल की खंडपीठ द्वारा इस केस में स्टे ना देकर इसकी अगली सुनवाई के लिए  15 जनवरी निर्धारित की गई थी। इस केस पर अब 15 जनवरी 2026 को सुनवाई होगी।

हाई कोर्ट के जस्टिस द्वारा जारी किए गए आदेश की कॉपी।

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